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ब्रज रस माधुरी

PART I · KIRTAN 49 · 73/240

कीर्तन 1–50

कीर्तन 49 · Kirtan 49

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

72 source linesपुस्तक पृष्ठ 111–115PDF 132–136

मेरी बरसाने वारी प्यारी प्यारी प्यारी,

(तू ही तू ही...)

मेरी बरसाने वारी प्यारी प्यारी प्यारी,

सुकुमारी भोरी भारी भानुदुलारी।

प्यारी प्यारी भोरी भारी बरसाने वारी,

बलिहारी बलिहारी बलिहारी प्यारी।

रस बरसाने वारी बरसाने वारी,

शरण शरण मैं तो शरण तिहारी।

प्यारी प्यारी भोरी भारी भानुदुलारी,

कृ पा करु कृ पा करु कृ पा करु प्यारी।

चाहे अपनाये चाहे ठुकराये प्यारी,

तू ही मेरी थी भी है भी रहेगी भी प्यारी।

जग में भी माँ को नहिं जाने शिशु प्यारी,

माँ ही जनावे वाय मैं हूँ महतारी।

मेरी बरसाने वारी भानुदुलारी,

दे दे ब्रजरस आया द्वार भिखारी।

बिनु कारण करुणा करि प्यारी,

ब्रजरस बूँद पिला सुकुमारी।

Source page 112

मोहनहूँ मन मोहिनि प्यारी,

हमरहुँ मन मोहहु सुकुमारी।

मन न शरण गह तव सुकुमारी,

टुक निज झलक दिखा दे प्यारी।

पियत विषय विष तव सुत प्यारी,

तू देखति कैसी महतारी।

चम्पक बरनि गौर तनु प्यारी,

सतचित आनँदघन तनु वारी।

सोरहों सिंगार करि बैठें जब प्यारी,

माथे काला टीका देयँ कुंज बिहारी।

प्यारी जू की प्यारी छवि एतिक प्यारी,

निज परछाईं लखि मोहें आपु प्यारी।

प्यारी बरसाने वारी एतिक प्यारी,

जाके पाछे पाछे डोलें ब्रह्म बनवारी।

मेरी ऐसी प्यारी प्यारी प्यारी सुकुमारी,

जापै वारी वारी जायें वारी बनवारी।

जय हो जय हो जय हो बरसाने वारी प्यारी,

तोपै वारी वारी बरसाने वारी प्यारी।

Source page 113

प्यारी भजें पिउ पिउ, पिउ भजें प्यारी,

बड़ भागी ब्रजनारी, भजें पिउ प्यारी।

प्यारी बोले जय हो जय हो जय हो जय हो प्यारी,

बनवारी बोलें जय हो जय हो जय हो प्यारी।

प्यारी कहें पिउ भजो, पिउ कहें प्यारी,

मेरी सब मानो भजो, नित पिय प्यारी।

वेद कह पूर्णब्रह्म कुंज बिहारी,

मैं तो कहूँ राधे बिनु आधे बनवारी।

मेरी प्यारी जू की जब चले असवारी,

पाछे चलि जय हो जय हो बोलें बनवारी।

आगे आगे चलें बरसाने वारी प्यारी,

वाके पाछे सखि वाके पाछे बनवारी।

जहँ जहँ चरण कमल धरें प्यारी,

तहँ तहँ चूमत चलें बनवारी।

सुमन सेज सोवें प्यारी सुकुमारी,

सखि चापें पग मलें हाथ बनवारी।

रास करन चह जब बनवारी,

मुकुट उतारि धरत पग प्यारी।

Source page 114

प्यारी जू के महल की जाऊँ बलिहारी,

देत बुहारी जहँ बस बनवारी।

जापै सब जग वारी सोइ बनवारी,

जापै सोऊ बनवारी वारी सोई प्यारी।

पिया को बुरा न कहो बुरा मानें प्यारी,

सोई बनवारी जोई भानुदुलारी।

मेरी बरसाने वारी अस सुकुमारी,

चापत चरन सभय बनवारी।

जेहि छवि लखि विधि हरि हर वारी,

सोउ “कृपालु” हरि लखि बलिहारी॥

राधे राधे राधे राधे प्रेम अगाधे,

ऐसी कृपा करु राधे प्रेम अगाधे।

तोहि कभूँ भूलूँ नहिं पल छिन आधे।

भुक्ति ना दे मुक्ति ना दे बैकुण्ठ ना दे,

देना है तो मेरी राधे प्रेम सुधा दे।

तेरे खरे खरे जन अगनित राधे,

उन खरों सँग मुझ खोटे को चला दे।

Source page 115

तू तो बिनु कारण कृपा करे राधे,

या ते बिनु साधन साध्य दिला दे।

ब्रज रस माधुरी · भाग १073
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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