कीर्तन 101–150
कीर्तन 116 · Kirtan 116
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
श्री गोविंद गोविंद बोल, राधे राधे गोविंद बोल।
राधे नाम अनमोल, राधे राधे गोविंद बोल।
राधे ध्यावो पुनि राधे राधे बोल, राधे राधे गोविन्द बोल।
है मानुष तन अनमोल, राधे राधे गोविंद बोल।
क्रंदन करि हरि बोल, राधे राधे गोविंद बोल।
तू गाँठ कपट की खोल, राधे राधे गोविंद बोल।
तू पी ले प्रेम रस घोल, राधे राधे गोविंद बोल।
पिउ नाम प्रेम रस घोल, राधे राधे गोविंद बोल।
ले हीरा मोेल अनमोल, राधे राधे गोविंद बोल।
है विरह वेदना मोेेल, राधे राधे गोविंद बोल।
निष्काम आँसु ले मोल, राधे राधे गोविंद बोल।
है भुक्ति मुक्ति महँ पोल, राधे राधे गोविंद बोल।
ले रतन “कृपालु” अमोेेल , राधे राधे गोविंद बोल।
Source page 211
महरानी हूँ की महरानी मेरी राधे रानी,
विहरति पिय सँग वृन्दावन रजधानी।
प्यारी प्यारी भोरी भारी भानुदुलारी प्यारी,
जय हो जय हो जय हो जय हो बरसाने वारी।
जापै जग वारी सोउ बनवारी वारी वारी,
प्यारी प्यारी भोरी भारी बरसाने वारी प्यारी।
