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ब्रज रस माधुरी

PART I · KIRTAN 116 · 140/240

कीर्तन 101–150

कीर्तन 116 · Kirtan 116

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

23 source linesपुस्तक पृष्ठ 210–211PDF 231–232

श्री गोविंद गोविंद बोल, राधे राधे गोविंद बोल।

राधे नाम अनमोल, राधे राधे गोविंद बोल।

राधे ध्यावो पुनि राधे राधे बोल, राधे राधे गोविन्द बोल।

है मानुष तन अनमोल, राधे राधे गोविंद बोल।

क्रंदन करि हरि बोल, राधे राधे गोविंद बोल।

तू गाँठ कपट की खोल, राधे राधे गोविंद बोल।

तू पी ले प्रेम रस घोल, राधे राधे गोविंद बोल।

पिउ नाम प्रेम रस घोल, राधे राधे गोविंद बोल।

ले हीरा मोेल अनमोल, राधे राधे गोविंद बोल।

है विरह वेदना मोेेल, राधे राधे गोविंद बोल।

निष्काम आँसु ले मोल, राधे राधे गोविंद बोल।

है भुक्ति मुक्ति महँ पोल, राधे राधे गोविंद बोल।

ले रतन “कृपालु” अमोेेल , राधे राधे गोविंद बोल।

महरानी राधारानी प्रेमरूपरसखानी,

जयति जयति जय वंृदावन ठकुरानी।

Source page 211

महरानी हूँ की महरानी मेरी राधे रानी,

विहरति पिय सँग वृन्दावन रजधानी।

प्यारी प्यारी भोरी भारी भानुदुलारी प्यारी,

जय हो जय हो जय हो जय हो बरसाने वारी।

जापै जग वारी सोउ बनवारी वारी वारी,

प्यारी प्यारी भोरी भारी बरसाने वारी प्यारी।

राधे राधे राधे राधे प्रेम अगाधे राधे,

राधे राधे राधे राधे राधे प्रेम सुधा दे राधे।

ब्रज रस माधुरी · भाग १140
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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