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ब्रज रस माधुरी

PART I · KIRTAN 212 · 236/240

कीर्तन 201–216

कीर्तन 212 · Kirtan 212

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

38 source linesपुस्तक पृष्ठ 304–306PDF 325–327

लाखों महफ़िल जहाँ में यूँ तो,

तेरी महफ़िल सी महफ़िल नहीं है।

स्वर्ग सम्राट हो या हो चाकर,

तेरे दर पे है दर्ज़ा बराबर।

तेरी हस्ती को हो जिसने जाना,

कोई आलम में आक़िल नहीं है॥

दर बदर खाके ठोकर जो थक कर,

आ गया ग़र कोई तेरे दर पर।

तूने नज़रों से जो रस पिलाया,

वो बताने के काबिल नहीं है॥

Source page 305

तुम जो कहते हो तुम हो हमारे,

जोड़ मुझ से ही तू नात सारे।

जान कर भी जो नाता न जोड़े,

उसके मानिंद जाहिल नहीं हैं॥

जीते मरते जो तेरी लगन में,

जलते रहते विरह की अगन में।

है भरोसा तेरा हे मुरारी!

तू दयालु है कातिल नहीं है॥

तेरे रस का लगा चस्का जिसको,

लगता बैकुंठ फीका सा उसको।

डूब कर कोइ बाहर न आया,

इसमें भँवरेँ हैं साहिल नहीं है॥

प्रेम में है सदा देना देना,

सोचना भी नहीं कुछ है लेना।

लेने वाला बड़ा भोला भाला,

ब्रज के रसिकों में शामिल नहीं है॥

मान ले उनको तू सिर्फ अपना,

सीख ले याद में बस तड़पना।

Source page 306

वे लगा लेंगे सीने से तुझको,

दिल में बैठे हैं गाफिल नहीं हैं॥

तू पिला दे जो इक बूँद रस की,

क्या कमी है तेरे पास रस की।

फिर जो छोड़े कोई तेरा पीछा,

ऐसा जाहिल भी काहिल नहीं है॥

कर्म है उनकी निष्काम सेवा,

धर्म है उनकी इच्छा में इच्छा।

सौंप दो इनके हाथों में डोरी,

ये “कृपालु” हैं तँगदिल नहीं हैं॥

ब्रज रस माधुरी · भाग १236
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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