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ब्रज रस माधुरी

PART I · KIRTAN 47 · 71/240

कीर्तन 1–50

कीर्तन 47 · Kirtan 47

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

10 source linesपुस्तक पृष्ठ 109PDF 130

जय जय पिय प्यारी, सुकुमारी, भोरी भारी नथवारी।

बलिहारी, छवि प्यारी, ऊँचे महल अटा वारी॥

जय जय पिय प्यारी, सुकुमारी, भोरी भारी नथवारी।

जय जय बलिहारी, छवि प्यारी, अगनित उमा रमा वारी।।

प्यारी अस प्यारी, सुकुमारी, वारी वारी बनवारी।

गिरिधारी, बनवारी, गति मति रति अति मतवारी।

नटवारी, छवि न्यारी, नवल नवल लीलाधारी॥

इक तो री, तनु गोरी, नीलो री तनु इक को री।

जय जय पिय प्यारी, सुकुमारी, नथवारी ब्रजरसवारी।

रस बोरी भल जोरी, लोे “कृपालु” मम चित चोरी॥

ब्रज रस माधुरी · भाग १071
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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