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ब्रज रस माधुरी

PART I · KIRTAN 128 · 152/240

कीर्तन 101–150

कीर्तन 128 · Kirtan 128

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

17 source linesपुस्तक पृष्ठ 231–232PDF 252–253

हमारो दोउ ठाकुर श्यामा श्याम।

(हमारी राधेरानी रस की खानी)

हमारो दोउ ठाकुर श्यामा श्याम।

करत नित लीला नित्य धाम।

विराजें नित श्यामा श्याम धाम।

लखत बड़भागिनि ब्रज की बाम।

बने शिव गोपी पूरनकाम।

बने ब्रज तरुवर आत्माराम।

रही ललचाती कमला बाम।

Source page 232

रमण करें जन सों आत्माराम।

हमारो धन श्यामा श्याम नाम।

रटो नित छिन छिन इनको नाम।

करो इन सुमिरन आठों याम।

बँधे दोऊ बंधन प्रेमदाम।

न लावो मन महँ कोउ काम।

रहौ बरसाने या नँदगाम।

पतित पावन दोउ श्यामा श्याम।

“कृपालुहिं” हाथन लेहु थाम।

ब्रज रस माधुरी · भाग १152
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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