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हमारो दोउ ठाकुर श्यामा श्याम।
(हमारी राधेरानी रस की खानी)
हमारो दोउ ठाकुर श्यामा श्याम।
करत नित लीला नित्य धाम।
विराजें नित श्यामा श्याम धाम।
लखत बड़भागिनि ब्रज की बाम।
बने शिव गोपी पूरनकाम।
बने ब्रज तरुवर आत्माराम।
रही ललचाती कमला बाम।
Source page 232
रमण करें जन सों आत्माराम।
हमारो धन श्यामा श्याम नाम।
रटो नित छिन छिन इनको नाम।
करो इन सुमिरन आठों याम।
बँधे दोऊ बंधन प्रेमदाम।
न लावो मन महँ कोउ काम।
रहौ बरसाने या नँदगाम।
पतित पावन दोउ श्यामा श्याम।
“कृपालुहिं” हाथन लेहु थाम।
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