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ब्रज रस माधुरी

PART I · KIRTAN 184 · 208/240

कीर्तन 151–200

कीर्तन 184 · Kirtan 184

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

61 source linesपुस्तक पृष्ठ 272–275PDF 293–296

आपका दर्शन गोविन्द राधे।

(राधा गोविन्द गीत-जन्माष्टमी)

आपका दर्शन गोविन्द राधे।

आपकी कृ पा ते ही होय बता दे॥

देवकी माता जू गोविन्द राधे।

आप हो सौभाग्यशालिनी बता दे॥

नन्द के आनन्द गोविन्द राधे।

प्रकटे आनन्दकन्द बता दे॥

पुत्र जन्म सुनि नन्द गोविन्द राधे।

रोम रोम आनन्दमग्न बता दे॥

नन्द ने स्नान किया गोविन्द राधे।

सुन्दर वस्त्र आदि पहिरे बता दे॥

Source page 273

नन्द ने बुलवाया गोविन्द राधे।

वेदज्ञ विप्रवर गर्ग बता दे॥

गर्ग कहें श्याम लखि गोविन्द राधे।

मेरा तो जन्म हुआ सफल बता दे॥

पुनि स्वस्तिवाचन गोविन्द राधे।

किया जातकर्म संस्कार बता दे॥

सजी धजी दो लाख गोविन्द राधे।

गायें भी दी ब्राह्मणों को बता दे॥

पुनि देवताओं की गोविन्द राधे।

करवायी पूजा सविधि बता दे॥

नन्द के बन्दीजन गोविन्द राधे।

आशीर्वाद देने आये बता दे॥

दुंदुभी भेरी आदि गोविन्द राधे।

लगे बजने सब बाजने बता दे॥

सब ब्रजवासी भी गोविन्द राधे।

गावें बधाई नाचें मत्त हो बता दे॥

Source page 274

सब ब्रजमण्डल गोविन्द राधे।

घर घर सुघर सजावे बता दे॥

ध्वजा पताका माला गोविन्द राधे।

पल्लवों की बन्दनवार सजा दे॥

गाय बैल बछड़ों को गोविन्द राधे।

तेल अरु हल्दी का लेप लगा दे॥

ब्रज के साथी ग्वाल गोविन्द राधे।

सजधज भेंट लै के आये बता दे॥

नन्द के पुत्र हुआ गोविन्द राधे।

शोर सुनि गोपियाँ विभोर बता दे॥

सब गोपी सजधज गोविन्द राधे।

नन्द घर आईं भेंट लै लै बता दे॥

नन्द घर आ आ गोपी गोविन्द राधे।

नन्दलाल को दे आशीष बता दे॥

लाला चिरजीवी हो गोविन्द राधे।

हरि करें उनकी रक्षा बता दे॥

Source page 275

पुनि सब गोपी मिली गोविन्द राधे।

मंगल गान गावें नाचें बता दे॥

मतवाले ग्वाले भी गोविन्द राधे।

एक दूजे पै दूध दही लुढ़का दे॥

माखन लोंदा लै लै गोविन्द राधे।

एक दूसरे पै फेंके बता दे॥

सब को ही मुँहमाँगी गोविन्द राधे।

वस्तु दी नन्द बाबा ने बता दे॥

रोहिणी भी सजधज गोविन्द राधे।

करें गोपियों का स्वागत बता दे॥

जो भी आया नन्द घर गोविन्द राधे।

सब को दिया उपहार बता दे॥

चोरी चोरी यह दृश्य गोविन्द राधे।

देखें विधि हरि हर सुर भी बता दे॥

स्वर्ग अप्सरायें भी गोविन्द राधे।

हर्ष ते नाचें विमान में बता दे॥

ब्रजराज की जय गिरिराज की जय,

जगद्गुरु श्री कृपालु महाराज की जय।

ब्रज रस माधुरी · भाग १208
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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