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ब्रज रस माधुरी

PART I · KIRTAN 101 · 125/240

कीर्तन 101–150

कीर्तन 101 · Kirtan 101

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

13 source linesपुस्तक पृष्ठ 188PDF 209

बलिहारी बरसाने वारी प्यारी के चरन,

(मन करु सुमिरन...)

बलिहारी बरसाने वारी प्यारी के चरन,

मेरी प्यारी के चरन नँदनंदन शरन।

मैं तो वारी वारी वारी नथवारी के चरन,

नथवारी के चरन नव पल्लव वरन।

बलिहारी वारी वारी बनवारी के चरन,

बनवारी के चरन अशरन के शरन।

बलिहारी पनिहारी ब्रजनारी के चरन,

ब्रजनारी के चरन यदुनंदन नमन।

बलिहारी गिरिधारी सुकुमारी के चरन,

पिय प्यारी के चरन लीलाधारी के चरन।

बलिहारी हौं “कृपालु” दोउ गवनि चरन,

दोउ गवनि चरन मुनि मनहुँ हरन।

ब्रज रस माधुरी · भाग १125
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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