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ब्रज रस माधुरी

PART I · KIRTAN 159 · 183/240

कीर्तन 151–200

कीर्तन 159 · Kirtan 159

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

22 source linesपुस्तक पृष्ठ 256–257PDF 277–278

जय जय सीताराम सीताराम, सीताराम सीताराम।

(गोविन्दा गोविन्दा)

जय जय सीताराम सीताराम, सीताराम सीताराम।

कोटि काम अभिराम सीताराम, सीताराम सीताराम।

एक रूप द्वै नाम सीताराम, सीताराम सीताराम।

राम बने सीता सीता बनीं राम, सीताराम सीताराम।

सीता बनीं श्यामा राम बने श्याम, सीताराम सीताराम।

श्यामा श्याम कहो चाहे सीताराम, सीताराम सीताराम।

कृपा में तो जीतें सीता हारें राम, सीताराम सीताराम।

भज सीता राम सीता राम, सीताराम सीताराम।

मेरे सीता राम सीता राम, सीताराम सीताराम।

बोलो सीता राम सीता राम, सीताराम सीताराम।

ध्यावो सीता राम सीता राम, सीताराम सीताराम।

गाओ सीता राम सीता राम, सीताराम सीताराम।

आओ सीता राम सीता राम, सीताराम सीताराम।

Source page 257

(गोविन्दा गोविन्दा)

राम जय जय राम जय जय राम,राम जय जय राम जय जय राम।

कोटि काम अभिराम श्रीराम, जय जय राम जय जय राम।

गावो राम ध्यावो राम पावो राम, जय जय राम जय जय राम।

सतचित आनंदघन राम, जय जय राम जय जय राम।

सब जीवन जीवन राम, जय जय राम जय जय राम।

टुक रो के पुकारो राम, भाजे अइहैं श्रीराम।

आओ राम आओ राम आओ राम, आओ राम आओ राम।

ब्रज रस माधुरी · भाग १183
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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