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ब्रज रस माधुरी

PART I · KIRTAN 214 · 238/240

कीर्तन 201–216

कीर्तन 214 · Kirtan 214

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

10 source linesपुस्तक पृष्ठ 307–308PDF 328–329

सरकार माफ हो गुस्ताख़ी, कुछ खोटी खरी सुनाता हूँ,

मैं तेरा हूँ तेरा होकर, दर दर की ठोकर खाता हूँ।

तू समरथ वारिस है फिर भी, लावारिस मैं कहलाता हूँ,

तू व्यापक हर जर्रे़ में है पर, दीदार न तेरा पाता हूँ।

है करम तेरा मुझ पर बेहद, यह भी अनुमान लगाता हूँ,

पर इस चंचल मन पर रहवर, अधिकार नहीं कर पाता हूँ।

मन में रहती दुनियादारी, बगुला सा ध्यान लगाता हूँ,

तुझको खुश करने की खातिर, आँसू भी नहीं बहाता हूँ।

Source page 308

कर नज़रे इनायत करुणाकर, मैं माया से घबराता हूँ,

झूठा ही सही पर नाम “कृपालु” लेकर तुझे बुलाता हूँ।

ब्रज रस माधुरी · भाग १238
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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