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ब्रज रस माधुरी

PART I · KIRTAN 21 · 45/240

कीर्तन 1–50

कीर्तन 21 · Kirtan 21

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

20 source linesपुस्तक पृष्ठ 49–50PDF 70–71

भज प्यारो प्यारो प्यारो प्रानन प्यारो।

(भजो गिरिधर...)

भज प्यारो प्यारो प्यारो प्रानन प्यारो।

भज ब्रजगोपिन नैनन तारो।

Source page 50

भज मोर मुकुट मुरली वारो।

भज ललित त्रिभंग अंग वारो।

भज प्यारो रँग नीलो, अंबर पीलो।

भज प्यारी रँग पीलो, अंबर नीलो।

भज प्यारी मन नीलो तनु है पीलो।

भज प्यारो मन पीलो तनु है नीलो।

भज ब्रज गोपीजन दृग अंजन।

भज भानुनन्दिनी नँदनंदन।

भज युगल चरन मन करि क्रन्दन।

भज प्रणत पतितजन मन रंजन।

भज ब्रजबनितनि धन नँदनंदन।

भज ब्रजरसिकन धन नँदनंदन।

भज नँदनंदन को राधा धन।

भज दिए गौर हरि गल बहिँयन।

भज व्याकुल दोउ भेंटन पतितन।

भज रसिक शिरोमणि गोपीजन।

भज भज “कृपालु” दोउ जीवनधन।

ब्रज रस माधुरी · भाग १045
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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