कीर्तन 1–50
कीर्तन 31 · Kirtan 31
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
हमारो पिय नँदनंदन बनवारी,
रसिक मन मानस हंस मुरारी। हमारो पिय....।
मदन मन मोहन कुंज बिहारी। हमारो पिय....।
स्वमन मोहन मोहन गिरिधारी। हमारो पिय....।
न मोही नहिँ कोउ अस ब्रजनारी। हमारो पिय....।
Source page 66
भईं प्यारी पिय पिय भये प्यारी। हमारो पिय....।
दोउन गति जानें दोउ गति न्यारी। हमारो पिय....।
युगल गल बहिंयन की छवि न्यारी। हमारो पिय....।
गई लुटि ब्रज भगवत्ता सारी। हमारो पिय....।
लखहु ग्वालन सँग मारामारी। हमारो पिय....।
नचावति ब्रज बनितनि दै तारी। हमारो पिय....।
यार की जानउँ यद्यपि जारी। हमारो पिय....।
वाई सों मोरी ह्वै गइ अब यारी। हमारो पिय....।
वरौं वाइको या रहउँ कुँवारी। हमारो पिय....।
गरज वाकी हो तो कर ले यारी। हमारो पिय....।
भिखारी नहिं हौं, हौं प्रेम पुजारी। हमारो पिय....।
बने आपुहिं आपुन घर वारी। हमारो पिय....।
पाइ गति गरलहुँ प्यावन वारी। हमारो पिय....।
न पायो ब्रजरस कमला नारी। हमारो पिय....।
बनायो वाने कुबरिहुँ घर वारी। हमारो पिय....।
