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ब्रज रस माधुरी

PART I · KIRTAN 31 · 55/240

कीर्तन 1–50

कीर्तन 31 · Kirtan 31

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

26 source linesपुस्तक पृष्ठ 65–66PDF 86–87

हमारो पिय नँदनंदन बनवारी,

(हमारो धन राधा...)

हमारो पिय नँदनंदन बनवारी,

हमारो पिय वृंदाविपिन बिहारी।

रसिक मन मानस हंस मुरारी। हमारो पिय....।

मदन मन मोहन कुंज बिहारी। हमारो पिय....।

स्वमन मोहन मोहन गिरिधारी। हमारो पिय....।

न मोही नहिँ कोउ अस ब्रजनारी। हमारो पिय....।

होत बलिहारी सुनि ब्रज गारी। हमारो पिय....।

हेंकड़ी भूलि जात लखि प्यारी। हमारो पिय....।

Source page 66

भईं प्यारी पिय पिय भये प्यारी। हमारो पिय....।

दोउन गति जानें दोउ गति न्यारी। हमारो पिय....।

युगल गल बहिंयन की छवि न्यारी। हमारो पिय....।

गई लुटि ब्रज भगवत्ता सारी। हमारो पिय....।

लखहु ग्वालन सँग मारामारी। हमारो पिय....।

नचावति ब्रज बनितनि दै तारी। हमारो पिय....।

यार की जानउँ यद्यपि जारी। हमारो पिय....।

वाई सों मोरी ह्वै गइ अब यारी। हमारो पिय....।

वरौं वाइको या रहउँ कुँवारी। हमारो पिय....।

गरज वाकी हो तो कर ले यारी। हमारो पिय....।

भिखारी नहिं हौं, हौं प्रेम पुजारी। हमारो पिय....।

बने आपुहिं आपुन घर वारी। हमारो पिय....।

पाइ गति गरलहुँ प्यावन वारी। हमारो पिय....।

न पायो ब्रजरस कमला नारी। हमारो पिय....।

बनायो वाने कुबरिहुँ घर वारी। हमारो पिय....।

प्रेम के बंधन बँधत मुरारी। हमारो पिय....।

अवशि मिलिहैं “कृपालु” बनवारी। हमारो पिय....।

ब्रज रस माधुरी · भाग १055
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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