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ब्रज रस माधुरी

PART I · KIRTAN 48 · 72/240

कीर्तन 1–50

कीर्तन 48 · Kirtan 48

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

19 source linesपुस्तक पृष्ठ 109–110PDF 130–131

जय जय बरसाने वारी प्यारी प्यारी प्यारी,

(मन भूल मत जइयो...)

जय जय बरसाने वारी प्यारी प्यारी प्यारी,

जय जय वृंदाविपिन बिहारी बनवारी।

वारी वारी सुकुमारी भोरी भारी प्यारी,

वारी वारी बनवारी कुंजबिहारी।

Source page 110

मेरी ऐसी भोरी भारी सुकुमारी प्यारी,

जापै वारी बनवारी छैेल बिहारी।

मेरी बरसाने वारी प्यारी प्यारी प्यारी,

जाके पाछे चलें लख लख ब्रजनारी।

मेरी ऐेसी बरसाने वारी सुकुमारी,

पाछे पाछे पिय बोलें “जय हो जय हो प्यारी”।

जय जय भानुनंदिनी जय जय नँदनंदन,

जय जय ब्रज गोपीजन, जय जय वृंदावन।

जय जय त्रिभुवन वंदन नँदनंदन,

जय जय ब्रज रसिकन जन जीवनधन।

मेरी ऐसी ठकुरानी ब्रजरसखानी,

करें कोटि कमला भवानी अगवानी।

मेरी ऐसी राधारानी रूपरसखानी,

जाको पदरज चह सारँग पानी।

ब्रज रस माधुरी · भाग १072
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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