कीर्तन 1–50
कीर्तन 40 · Kirtan 40
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
रस बरसाने वारी बरसाने वारी,
छकि के पियत नित सारी ब्रजनारी।
प्यारी जू की महिमा को जानें ब्रजनारी,
प्यारी कृपा कछु कछु जानें बनवारी।
ब्रजरस चुवे रोम रोम तनु प्यारी,
ब्रज नारी पियें ललचावें बनवारी।
आगे आगे प्यारी चलें पाछे ब्रजनारी,
वाके पाछे पिय चलें कहि जय हो प्यारी।
प्यारी पिय रस पिये, पिय रस प्यारी,
पिय प्यारी रस पियें सब ब्रजनारी।
मेरी जैसी कुंज विहारिणि प्यारी,
प्यारी जू की सेवा करें नित ब्रजनारी,
गोपी की कृपा ते पावें सेवा बनवारी।
Source page 98
प्यारी प्यारी भोरी भारी बरसाने वारी,
मेरी प्यारी प्यारी बरसाने वारी प्यारी,
मैं तो प्यारी पर तन मन प्रान वारी।
रँगीली महल वारी प्यारी प्यारी प्यारी,
ब्रज रस वारी प्यारी बरसाने वारी।
नथवारी रँगीली महल वारी प्यारी।
मेरी प्यारी प्यारी बरसाने वारी प्यारी,
जाके पाछे पाछे डोलें बाँकेबिहारी।
रँगीली महलवारी प्यारी सुकुमारी,
Source page 99
प्राण प्यारे प्यारे अरु प्राण प्यारी प्यारी,
किंतु उन्नइस प्यारो बीस मेरी प्यारी।
सोउ डरे जासों ऐसी बरसाने वारी।
मेरी ऐसी प्यारी प्यारी बरसाने वारी,
मेरी ऐसी बरसाने वारी छवि प्यारी,
सोरहों सिंगार करि बैठें जब प्यारी,
प्यारी माथे काला टीका देंय बनवारी।
प्यारी पर वारी वारी वारी बनवारी,
बनवारी पर वारी वारी वारी प्यारी।
बुरा न कहो जो कारी तनु बनवारी,
Source page 100
प्यारी प्यारी भोरी भारी भानुदुलारी,
गोरी गोरी भोरी भारी ब्रजरस बोरी,
मैं भी तो हूँ तोरी मोरी सुधि लो किशोरी।
तू तो बिनु कारण कृपा करे प्यारी,
मैं भी तो हूँ तेरी चेरी सुधि लो हमारी।
