लोड हो रहा है…लोड हुँदैछ…
Skip to main content

ब्रज रस माधुरी

PART I · KIRTAN 40 · 64/240

कीर्तन 1–50

कीर्तन 40 · Kirtan 40

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

59 source linesपुस्तक पृष्ठ 97–100PDF 118–121

रस बरसाने वारी बरसाने वारी,

(परिक्रमा)

रस बरसाने वारी बरसाने वारी,

छकि के पियत नित सारी ब्रजनारी।

प्यारी जू की महिमा को जानें ब्रजनारी,

प्यारी कृपा कछु कछु जानें बनवारी।

ब्रजरस चुवे रोम रोम तनु प्यारी,

ब्रज नारी पियें ललचावें बनवारी।

आगे आगे प्यारी चलें पाछे ब्रजनारी,

वाके पाछे पिय चलें कहि जय हो प्यारी।

प्यारी पिय रस पिये, पिय रस प्यारी,

पिय प्यारी रस पियें सब ब्रजनारी।

मेरी जैसी कुंज विहारिणि प्यारी,

वारौं जापै कोटिन कुंजबिहारी।

प्यारी जू की सेवा करें नित ब्रजनारी,

गोपी की कृपा ते पावें सेवा बनवारी।

जन क्रन्दन सहि सक नहिं प्यारी,

सुनत भजति तजि कुंजबिहारी।

Source page 98

प्यारी प्यारी भोरी भारी बरसाने वारी,

सुकुमारी नथ बेसर वारी प्यारी।

मेरी प्यारी प्यारी बरसाने वारी प्यारी,

मैं तो प्यारी पर तन मन प्रान वारी।

रँगीली महल वारी प्यारी प्यारी प्यारी,

ब्रज रस वारी प्यारी बरसाने वारी।

नथवारी रँगीली महल वारी प्यारी।

मादन रसवारी अति सुकुमारी।

मेरी प्यारी प्यारी बरसाने वारी प्यारी,

जाके पाछे पाछे डोलें बाँकेबिहारी।

बनवारी चाकर स्वामिनि प्यारी।

भोरे जन कहें ठाकुर बनवारी।

रँगीली महलवारी प्यारी सुकुमारी,

सोई मम स्वामिनि भानुदुलारी।

जब जब निकसत प्यारी की सवारी,

पाछे पाछे जय हो, जय हो बोलें बनवारी।

सजि धजि चलें जब बरसाने वारी।

ऊँचे स्वर बनवारी बोलें बलिहारी।

Source page 99

प्राण प्यारे प्यारे अरु प्राण प्यारी प्यारी,

किंतु उन्नइस प्यारो बीस मेरी प्यारी।

जाके डर डरे डर ऐसो बनवारी,

सोउ डरे जासों ऐसी बरसाने वारी।

मेरी ऐसी प्यारी प्यारी बरसाने वारी,

लखतहिं वारी वारी जायँ बनवारी।

मेरी ऐसी बरसाने वारी छवि प्यारी,

जाकी परछाईं लखि वारी बनवारी।

सोरहों सिंगार करि बैठें जब प्यारी,

प्यारी माथे काला टीका देंय बनवारी।

प्यारी पर वारी वारी वारी बनवारी,

बनवारी पर वारी वारी वारी प्यारी।

बुरा न कहो जो कारी तनु बनवारी,

कारी तनु पर वारी गोरी तनु प्यारी।

तूने मोह्यो मन बनवारी,

मन “कृपालुहुँ” मोहहु प्यारी।

Source page 100

प्यारी प्यारी भोरी भारी भानुदुलारी,

शरण शरण मैं तो शरण तिहारी।

गोरी गोरी भोरी भारी ब्रजरस बोरी,

मैं भी तो हूँ तोरी मोरी सुधि लो किशोरी।

तू तो बिनु कारण कृपा करे प्यारी,

मैं भी तो हूँ तेरी चेरी सुधि लो हमारी।

तेरे रोम रोम चुवे ब्रजरस प्यारी,

मोकूँ इक बूँद ही पिला दे महतारी।

ब्रज रस माधुरी · भाग १064
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

Related official book listing · Official full collection · Official author website · Read as text