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ब्रज रस माधुरी

PART I · KIRTAN 89 · 113/240

कीर्तन 51–100

कीर्तन 89 · Kirtan 89

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

94 source linesपुस्तक पृष्ठ 163–168PDF 184–189

जय राधे कृष्ण राधे कृष्ण राधे कृष्ण राधे।

जय राधे कृष्ण राधे॥

कृष्ण नाम अटपट, सूधो नाम राधे।

कृष्ण तो हैं टेढ़े मेढ़े, सीधी सादी राधे।

कृष्ण बड़े नटखट, भोरी भारी राधे।

कृष्ण बड़े निष्ठुर, दयामयी राधे।

कृष्ण ब्रज तजि भाजे, ब्रज राजें राधे।

कृष्ण बसें नंदगाम, बरसाने राधे।

कृष्ण तो हैं कारे कारे, गोरी गोरी राधे।

कृष्ण तो हैं चंचल, गंभीरा राधे।

कृष्ण को चिढ़ावें लखि, कारो रंग राधे।

Source page 164

कृष्ण को कसौटी रंग, सुबरन राधे।

कृष्ण फिरें वन वन, महलन राधे।

कृष्ण धारें गुंजमाल, मुक्तामाल राधे।

कृष्ण धारें पीले पट, नीले पट राधे।

कृष्ण तो हैं लंपट, कृष्णव्रता राधे।

कृष्ण तो हैं निर्लज्ज, लज्जामयी राधे।

कृष्ण तो हैं ग्वारिया, महरानी राधे।

कृष्ण तो हैं प्यारे प्यारे, उनते प्यारी राधे।

कृष्ण तो हैं चाकर, ठकुरानी राधे।

कृष्ण तो हैं ऋणियाँ, साहूकार राधे।

कृष्ण की तृष्णा ना जाये, घूरे जायँ राधे।

कृष्ण होंय मुरछित, देखि छवि राधे।

कृष्ण गावें मुरलि में, गुन गन राधे।

कृष्ण भागे आवें जब, कोई बोले राधे।

कृष्ण को जो पाना चाहो, रटो राधे राधे।

कृष्ण पावें प्रेम जब, कृपा करें राधे।

कृष्ण करें रास जब, आज्ञा देवें राधे।

कृष्ण भी हैं रस किंतु, रससिंधु राधे।

कृष्ण जग मोहन, वाऊ मोहें राधे।

Source page 165

कृष्ण भूलें भगवत्ता, लखें जब राधे।

कृष्ण मोहें मदनहुँ, वाऊ मोहें राधे।

कृष्ण को तो मानें सब, जानि जन राधे।

कृष्ण की न दाल गले, सन्मुख राधे।

कृष्ण भूलें सिट्टी पिट्टी, लखि मान राधे।

कृष्ण अपनावें जब, अपनावें राधे।

कृष्ण को न दंद फंद, चले आगे राधे।

कृष्ण अगवानी करें, कहि जय राधे।

कृष्ण आये अंधेरे में, उजाले में राधे।

कृष्ण आये चोरी चोरी, खुल्लमखुल्ला राधे।

कृष्ण आये पाछे पाछे, पहले आयीं राधे।

कृष्ण के तो दो दो मैया, मैया एक राधे।

कृष्ण प्रेम मधुप सों, चातक सों राधे।

कृष्ण बँधे ऊखल, वेणीबंध राधे।

कृष्ण को ऐश्वर्य भाजे, लखि छवि राधे।

कृष्ण धार्यो कोटि रूप, जान्यो नहिं राधे।

कृष्ण के है पास जो भी, दिया सब राधे।

कृष्ण प्रेम भिक्षुक, दाता रानी राधे।

कृष्ण को पतंग जानो, डोरी जानो राधे।

Source page 166

कृष्ण करें मारधाड़, बाँटें प्यार राधे।

कृष्ण तो देवें बुहारी, महलन राधे।

कृष्ण तो मनावें जब, मान करें राधे।

कृष्ण बनि श्यामा सखि, रिझवत राधे।

कृष्ण हा हा खायँ, पैयाँ परें आगे राधे।

कृष्ण तो मुकुट धारें, धरि पग राधे।

कृष्ण रिरियावें आगे, सखियन राधे।

कृष्ण को तो जानें सब, कोई जाने राधे।

कृष्ण को नचाना चाहो, बनो दासी राधे।

कृष्ण सब पाछे बोलें, पहले बोलें राधे।

कृष्ण भी हैं दानी, किन्तु महादानी राधे।

कृष्ण को बनावें कृष्ण योगमाया राधे।

कृष्ण तो हैं सेवक, स्वामिनि राधे।

कृष्ण राख्यो मुख शुक, उर राख्यो राधे।

कृष्ण बड़ो बदनाम, बड़ो यश राधे।

कृष्ण को रुलाना चाहो, रुठवाओ राधे।

कृष्ण आगे “रा” बोलो, कृष्ण बोलें राधे।

कृष्ण तो हैं न्यायी, दयामयी राधे।

कृष्ण तो हैं मुजरिम, न्यायाधीश राधे।

Source page 167

कृष्ण करें चोरी जायें, कोतवाली राधे।

कृष्ण करें अपराध, क्षमा करें राधे।

कृष्ण टेढ़ेपन को तो, सीधा करें राधे।

कृष्ण की बुरायी छुपी, पाइ संग राधे।

कृष्ण तो हैं लबरा, सच बोलें राधे।

कृष्ण तो हैं शरणार्थी, शरण देवें राधे।

कृष्ण नाचें लट्टू जैसे, राखें रुचि राधे।

कृष्ण भावें शुद्ध मन, सभी मन राधे।

कृष्ण पूर्णब्रह्म झूठे, राधे बिनु आधे।

कृष्ण को बुरा ना कहो, बुरा मानें राधे।

कृष्ण को माधुर्य जो है, वो ही तो है राधे।

कृष्ण की हैं आत्मा, व्यास कहें राधे।

कृष्ण बिनु राधे, राधे बिनु कृष्ण आधे।

कृष्ण रोयें राधे बिनु कृष्ण बिनु राधे।

राधे ही हैं कृष्ण अरु, कृष्ण ही हैं राधे।

राधे उर बसे कृष्ण, कृष्ण उर राधे।

राधे ही बनी हैं कृष्ण, कृष्ण बने राधे।

राधे कहे भजो कृष्ण, कृष्ण कहे राधे।

फल एक कृष्ण भजो या भजो राधे।

Source page 168

भेद भी अभेद भी है कृष्ण अरु राधे।

कृष्ण शक्ति मान शक्ति ह्लादिनि राधे।

मेरे ठाकुर कृष्ण ठकुरानी राधे।

मेरे स्वामी कृष्ण मेरी स्वामिनि राधे।

राधे भजें कृष्ण कृष्ण, कृष्ण भजें राधे।

राधे भजे कृष्ण मिलें, कृष्ण भजे राधे।

कृष्ण भजो या “कृपालु”, भजो राधे राधे।

ब्रज रस माधुरी · भाग १113
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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