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ब्रज रस माधुरी

PART I · KIRTAN 112 · 136/240

कीर्तन 101–150

कीर्तन 112 · Kirtan 112

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

32 source linesपुस्तक पृष्ठ 204–205PDF 225–226

राधे राधे गोविंद, गोविंद राधे राधे।

(दृगन बिच हलकैं अलि अलकें)

राधे राधे गोविंद, गोविंद राधे राधे।

श्री वृषभानुनंदिनी राधे,

नँदनन्दन गोविंद श्री राधे राधे।

प्रेम रूप रस रूपिणि राधे,

सोइ रूप नँदनंद श्री राधे राधे।

जोइ वृषभानुनंदिनी राधे,

सोइ जानिय गोविंद श्री राधे राधे।

महाभावरूपिणि श्री राधे,

रस अम्बुधि गोविंद श्री राधे राधे।

अलबेली सरकार राधे,

अलबेलो गोविंद श्री राधे राधे।

श्री बरसानो राजति राधे,

नन्दगाम गोविंद श्री राधे राधे।

गहवर कुंजनि विहरति राधे,

गोवर्धन गोविंद श्री राधे राधे।

गोपिन संग विराजति राधे,

Source page 205

गोपन सँग गोविंद श्री राधे राधे।

वृन्दावन विहरति श्री राधे,

संग संग गोविंद श्री राधे राधे।

प्रेम रूप रस घन धन राधे,

गोधन धन गोविंद श्री राधे राधे।

आरत नाम पुकारत राधे,

भजत सुनन गोविंद श्री राधे राधे।

पतितन अपनावति श्री राधे,

निर्मल मन गोविंद श्री राधे राधे।

पायो मादन रस इक राधे,

नहिं पायो गोविंद श्री राधे राधे।

रस अम्बुधि रसिका श्री राधे,

रसिक रास गोविंद श्री राधे राधे।

कीन्यो कृपा दृष्टि जब राधे,

भे “कृपालु” गोविंद श्री राधे राधे।

ब्रज रस माधुरी · भाग १136
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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