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ब्रज रस माधुरी

PART I · KIRTAN 88 · 112/240

कीर्तन 51–100

कीर्तन 88 · Kirtan 88

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

23 source linesपुस्तक पृष्ठ 162–163PDF 183–184

स्वामिनि श्यामा स्वामी श्याम,

(भजु मन मेरे आठो...)

स्वामिनि श्यामा स्वामी श्याम,

विहरत नित वृन्दावन धाम।

रास करत दोउ पूरन काम,

ब्रजरस बरसावत वसुयाम।

इक शृंगार एक छविधाम,

लेहु अमोल मोल बिनु दाम।

युगल ध्यान धरि गाइय नाम,

क्रंदन सुनत लेत कर थाम।

तजहु कामना पकरहु पाम,

माँगहु एक प्रेम निष्काम।

ब्रज रस पाव न कमला बाम,

वा रस दे वनचरि अविराम।

हरि गुरु सेवा ही रह काम,

करु बैकुंठहुँ को जय राम।

विहरत सँग लै जिन ब्रजबाम,

वे सखि हरि प्रतिबिम्ब ललाम।

Source page 163

इक ते इक बढ़ि दोउ छवि धाम,

प्रेमवश्य नहिं दाम छदाम।

युगल शरण गहु लहु विश्राम,

चहु सेवा अरु रहु ब्रजधाम।

ब्रजरस मिलत सदा बिनु दाम,

शरण“कृपालु”जाहु ब्रजभाम॥

ब्रज रस माधुरी · भाग १112
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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