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ब्रज रस माधुरी

PART I · KIRTAN 5 · 29/240

कीर्तन 1–50

कीर्तन 5 · Kirtan 5

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

27 source linesपुस्तक पृष्ठ 32–33PDF 53–54

आजा नँदनंदन आ जा नँदनंदन,

(परिक्रमा)

आजा नँदनंदन आ जा नँदनंदन,

यह ब्रज तो है तोरा आजा नँदनंदन।

तेरे बिन सूना ब्रज आजा नँदनंदन।

मोटी रोटी माखन खा जा नँदनंदन।

दरस दिखा जा पुनि आजा नँदनंदन।

कलि को तू ब्रज ते भगा जा नँदनंदन।

ब्रज न तजौँ कहा था आजा नँदनंदन।

Source page 33

ब्रजरस ब्रज बरसा जा नँदनंदन।

सखि सँग रास रचा जा नँदनंदन।

ऐसा आजा आ के पुनि ना जा नंँदनंदन।

मैं जो जा जा कहूँ तो भी ना जा नँदनंदन।

आवे ना बुलानो मोहिं आजा नँदनंदन।

कहा घटि जाय तोरा आजा नँदनंदन।

पाछा नहिं छोड़ूँ तोरा आजा नँदनंदन।

मुरली की तान सुना जा नँदनंदन।

“दारीके” की ब्रजगारी खा जा नँदनंदन।

विरह की अगिनि लगा जा नँदनंदन।

मिलन की लगन लगा जा नँदनंदन।

तोको न सताऊँ अब आजा नँदनंदन।

जोई भावै सोई करु आजा नँदनंदन।

तू जो कहे सोई करुँ आजा नँदनंदन।

भलो बुरो जो हूँ तेरो आजा नँदनंदन।

काऊ सों बताऊँ नहिं आजा नँदनंदन।

चोरी चोरी उर में समा जा नँदनंदन।

तू ही मेरा मैं भी तेरा आजा नँदनंदन।

तू तो है “कृपालु” अति आजा नँदनंदन।

ब्रज रस माधुरी · भाग १029
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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