कीर्तन 51–100
कीर्तन 61 · Kirtan 61
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
मेरी स्वामिनि श्यामा प्यारी, यह जीवन उन पर वारी।
मेरी स्वामिनि श्यामा प्यारी, यह जीवन उन पर वारी।
मेरी स्वामिनि अस रस वारी, लखि रसिक शिरोमणि वारी।
मेरी अस वृषभानुदुलारी, रह चाकर बनि बनवारी।
मेरी प्यारिहिं लखत बिहारी, भूलत भगवत्ता सारी।
मेरी स्वामिनि लखि अस वारी,हरि कह जय जय बलिहारी।
मेरी अस चितवनि रस प्यारी, लखि गिरत धरणि गिरिधारी।
मेरी अस मुसकनि छवि प्यारी, लखि लखत रहत बनवारी।
मेरी अस छवि रस सुकुमारी, लखि हरि निज सुरति बिसारी।
मेरी अस बरसाने वारी, जेहि लगि हरि बन गए नारी।
मेरी अस नथ बेसर वारी, हरि महलन देत बुहारी।
मेरी अस प्यारी सुकुमारी, दाता हरि बन्यो भिखारी।
