लोड हो रहा है…लोड हुँदैछ…
Skip to main content

ब्रज रस माधुरी

PART I · KIRTAN 61 · 85/240

कीर्तन 51–100

कीर्तन 61 · Kirtan 61

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

14 source linesपुस्तक पृष्ठ 129PDF 150

मेरी स्वामिनि श्यामा प्यारी, यह जीवन उन पर वारी।

(मेरी राधारमण सो यारी...)

मेरी स्वामिनि श्यामा प्यारी, यह जीवन उन पर वारी।

मेरी स्वामिनि अस रस वारी, लखि रसिक शिरोमणि वारी।

मेरी अस वृषभानुदुलारी, रह चाकर बनि बनवारी।

मेरी प्यारिहिं लखत बिहारी, भूलत भगवत्ता सारी।

मेरी स्वामिनि लखि अस वारी,हरि कह जय जय बलिहारी।

मेरी अस चितवनि रस प्यारी, लखि गिरत धरणि गिरिधारी।

मेरी अस मुसकनि छवि प्यारी, लखि लखत रहत बनवारी।

मेरी अस छवि रस सुकुमारी, लखि हरि निज सुरति बिसारी।

मेरी अस बरसाने वारी, जेहि लगि हरि बन गए नारी।

मेरी अस नथ बेसर वारी, हरि महलन देत बुहारी।

मेरी अस प्यारी सुकुमारी, दाता हरि बन्यो भिखारी।

मेरी अस मृदु बोलनि प्यारी, लग हरिहिं मुरलि धुनि खारी।

मेरी अस “कृपालु” सुकुमारी, टुक क्रन्दन पै बलिहारी।

ब्रज रस माधुरी · भाग १085
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

Related official book listing · Official full collection · Official author website · Read as text