लोड हो रहा है…लोड हुँदैछ…
Skip to main content

ब्रज रस माधुरी

PART I · KIRTAN 39 · 63/240

कीर्तन 1–50

कीर्तन 39 · Kirtan 39

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

41 source linesपुस्तक पृष्ठ 94–96PDF 115–117

मेरी राधारानी मेरी प्रेम रस खानी,

(परिक्रमा)

मेरी राधारानी मेरी प्रेम रस खानी,

मेरी ठकुरानी मेरी ब्रज महरानी।

ब्रजरस खानी ब्रजरानी ठकुरानी,

शरण शरण तेरी मेरी राधारानी।

प्रेम भिखारी आया द्वार राधारानी,

दे दो दान ठकुरानी अवढर दानी।

माना मैं बुरा हूँ हूँ तो तेरा राधारानी,

यामें तो है दोषी तेरी माया ठकुरानी।

Source page 95

मेरी राधारानी ऐसी करुणा की खानी,

जो भी रो के माँगे प्रेम देति महरानी।

“जय हो, जय हो” मेरी ठकुरानी राधारानी,

जाकी नौकरानी कोटि कमला भवानी।

राधारानी महरानीहूँ महरानी,

राधारानी ठाकुरहूँ ठकुरानी।

मेरी ऐसी राधारानी ब्रजरस खानी,

जाकी करें अगवानी वानी व शिवानी।

मेरी जैसी राधारानी वैसी राधारानी,

जाकी पदरज चह सारँगपानी।

निकसत जबहिँ सवारी राधारानी,

“जय हो, जय हो” बोलें सारँगपानी।

सोरहों सिंगार जब करें राधारानी,

पिय कह “जय हो” करि ऊपर पानी।

मैं तो हूँ दिवानी तेरी मेरी राधारानी,

नहिं चह भुक्ति मुक्ति सारँगपानी।

मेरी ऐसी राधारानी ब्रज ठकुरानी,

सारँगपानी करें जाकी अगवानी।

Source page 96

रोम रोम रस चुवे तनु राधारानी,

पियें पूर्णकाम श्याम पुण्यपुंज मानी।

जहँ जहँ चरण धरत राधारानी,

तहँ तहँ सिर धरें सारँगपानी।

सबके हैं ठाकुर सारँगपानी,

उनकी भी ठकुरानी मेरी राधारानी।

आनंद रूप मेरे सारँगपानी,

महाभाव प्रेम रूप मेरी राधेरानी।

महरानीहूँ की महरानी राधेरानी,

विहरति नित वृंदावन रजधानी।

मेरी राधेरानी प्रेम रूप रसखानी,

जासोँ प्रेम भिक्षा माँगें सारँगपानी।

जाके आगे जोरें पानी सारँगपानी,

सोई हैं “कृपालु” राधारानी रसखानी॥

ब्रज रस माधुरी · भाग १063
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

Related official book listing · Official full collection · Official author website · Read as text