कीर्तन 1–50
कीर्तन 39 · Kirtan 39
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
मेरी राधारानी मेरी प्रेम रस खानी,
मेरी राधारानी मेरी प्रेम रस खानी,
मेरी ठकुरानी मेरी ब्रज महरानी।
प्रेम भिखारी आया द्वार राधारानी,
Source page 95
मेरी राधारानी ऐसी करुणा की खानी,
जो भी रो के माँगे प्रेम देति महरानी।
“जय हो, जय हो” मेरी ठकुरानी राधारानी,
मेरी ऐसी राधारानी ब्रजरस खानी,
जाकी करें अगवानी वानी व शिवानी।
मेरी जैसी राधारानी वैसी राधारानी,
“जय हो, जय हो” बोलें सारँगपानी।
सोरहों सिंगार जब करें राधारानी,
मैं तो हूँ दिवानी तेरी मेरी राधारानी,
नहिं चह भुक्ति मुक्ति सारँगपानी।
Source page 96
पियें पूर्णकाम श्याम पुण्यपुंज मानी।
उनकी भी ठकुरानी मेरी राधारानी।
महाभाव प्रेम रूप मेरी राधेरानी।
मेरी राधेरानी प्रेम रूप रसखानी,
जासोँ प्रेम भिक्षा माँगें सारँगपानी।
