कीर्तन 101–150
कीर्तन 117 · Kirtan 117
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
राधे गोविन्द गोविन्द गोविन्द राधे।
राधे गोविन्द गोविन्द गोविन्द राधे।
तेरी लगन में मेरो मन मगन बना दे।
Source page 212
तू रीझेगा केहि विधि आ के बता दे।
सुने श्याम न तुम सुनु स्वामिनि राधे।
निज रसिक जनों ते गोपी प्रेम दिला दे।
मोहिं गोपी प्रेम रस का चस्का लगा दे।
ब्रज गोपीजनों में मेरा नाम लिखा दे।
मेरे सोये हुये सौभाग्य जगा दे।
टुक प्रेम सुधा रस बिंदु पिला दे।
मोहिं ब्रजरस अम्बुधि मध्य डुबा दे।
मेरे “मैं” को प्रेम रस सिंधु डुबा दे।
मेरी नैया को ब्रजरस सिंधु डुबा दे।
ब्रजवास दिला के मालामाल बना दे।
ब्रजधाम की मोहिँ ब्रजरेनु बना दे।
Source page 213
ब्रजधाम भी तू है विश्वास दिला दे।
पिय प्यारी व्यजन को पवन बना दे।
दोउ मान प्रणय की लीला दिखा दे।
निज दासी की दासी की दासी बना दे।
मोहिँ लाड़लि महल की टहल दिला दे।
“तू ही मेरा है यह मोहिँ बोध करा दे।
तेरे नाम में तू है ये बोध करा दे।
तोहिँ भूलूँ न भूलेहुँ पल छिन आधे।
तू है दीनबंधु मोहिँ दीन बना दे।
Source page 214
मन माने न हठीलो टुक झलक दिखा दे।
बतलाउँगा काहू सों ना शपथ दिला दे।
विश्वास न हो तो मोहिँ मूक बना दे।
मेरे उर में बसे औ किराया भी ना दे।
भुक्ति मुक्ति डाकिनी को मेरे उर से भगा दे।
तोसों माँगूं न कछु निष्काम बना दे।
“तेरा मैं” न, “तू मेेरा” ये भाव बना दे।
रो के माँगा करूँ प्रेम तू चाहे ना दे।
प्रेम दे दे दरस चाहे दे चाहे ना दे।
निज मधुर मिलन की अगिनि लगा दे।
इक बार “तू मेरी है” बोल सुना दे।
इक बार लगा के उर चाहे भुला दे।
Source page 215
माँगूँ मुक्ति न तव पद भ्रमर बना दे।
कछु देना न हो तो आके सिर ही हिला दे।
अपनावोगे? हाँ या ना में बता दे।
तोहिँ छोड़ूँ तो जाऊँ किस द्वार बता दे।
लागी छूटे न चाहे पूरा जोर लगा दे।
तेरी माया प्रबल वाय मारि भगा दे।
तेरी माया ने भुलाया मोहिँ तू न भुला दे।
तेरी माया को जीता हो नाम बता दे।
जग अच्छे को निभाते तू बुरे को निभा दे।
जो बुरा हूँ तेरा हूँ तू अच्छा बना दे।
मैं हूँ खोटा खरों के संग चला दे।
कहलाऊँगा तेरा चाहे जो भी सज़ा दे।
शिशु माय को न जाने वाय माय जना दे।
झुँझला के ही मोहिँ इक बार बुला दे।
