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ब्रज रस माधुरी

PART I · KIRTAN 117 · 141/240

कीर्तन 101–150

कीर्तन 117 · Kirtan 117

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

83 source linesपुस्तक पृष्ठ 211–215PDF 232–236

राधे गोविन्द गोविन्द गोविन्द राधे।

(कृष्णा गोविन्द गोविन्द...)

राधे गोविन्द गोविन्द गोविन्द राधे।

निज चरण कमल की लगन लगा दे।

तेरी लगन में मेरो मन मगन बना दे।

मोहिँ प्रेमनगर की डगर बता दे।

मोहिँ प्रीति करन की रीति सिखा दे।

जेहि गीत सोँ रीझो सोइ गीत सिखा दे।

Source page 212

तू रीझेगा केहि विधि आ के बता दे।

सुने श्याम न तुम सुनु स्वामिनि राधे।

निज रसिक जनों ते गोपी प्रेम दिला दे।

मोहिं गोपी प्रेम रस का चस्का लगा दे।

ब्रज गोपीजनों में मेरा नाम लिखा दे।

मेरे सोये हुये सौभाग्य जगा दे।

टुक प्रेम सुधा रस बिंदु पिला दे।

मोहिं ब्रजरस अम्बुधि मध्य डुबा दे।

मेरे “मैं” को प्रेम रस सिंधु डुबा दे।

मेरी नैया को ब्रजरस सिंधु डुबा दे।

ब्रजवास दिला के मालामाल बना दे।

ब्रजधाम की मोहिँ ब्रजरेनु बना दे।

ब्रजधाम की कुंज लतान बना दे।

ब्रजधाम को ताल तमाल बना दे।

ब्रजधाम का केकी कीर बना दे।

ब्रजधाम का साल रसाल बना दे।

ब्रजधाम का शुक पिक गोप बना दे।

ब्रजधाम का अम्ब कदम्ब बना दे।

ब्रजधाम की चम्पा चमेली बना दे।

Source page 213

ब्रजधाम को मोर चकोर बना दे।

ब्रजधाम भी तू है विश्वास दिला दे।

बनमाली की गल बनमाल बना दे।

निज कुंजभवन को गगन बना दे।

पिय प्यारी व्यजन को पवन बना दे।

जहँ रास करो सोइ गगन बना दे।

ललितादि सखिन सँग रास दिखा दे।

दोउ मान प्रणय की लीला दिखा दे।

मेरा खोया हुआ दासत्व दिला दे।

निज दासी की दासी की दासी बना दे।

मोहिँ लाड़लि महल की टहल दिला दे।

“तू ही मेरा है यह मोहिँ बोध करा दे।

तेरे नाम में तू है ये बोध करा दे।

करि चपल दृगंचल विकल बना दे।

मेरी सिगरी बिगरी बात बना दे।

तोहिँ भूलूँ न भूलेहुँ पल छिन आधे।

तू है दीनबंधु मोहिँ दीन बना दे।

जिस मन ते धरूँ ध्यान वो मन ला दे।

चित चपल चरण निज अचल बना दे।

Source page 214

मन माने न हठीलो टुक झलक दिखा दे।

शरणागत होने का नियम हटा दे।

पूतना ने गही कब शरण बता दे।

अपना ले अगर और मगर हटा दे।

बतलाउँगा काहू सों ना शपथ दिला दे।

विश्वास न हो तो मोहिँ मूक बना दे।

मेरे उर में बसे औ किराया भी ना दे।

भुक्ति मुक्ति डाकिनी को मेरे उर से भगा दे।

तोसों माँगूं न कछु निष्काम बना दे।

“तेरा मैं” न, “तू मेेरा” ये भाव बना दे।

निज योेग वियोग को रोग लगा दे।

रो के माँगा करूँ प्रेम तू चाहे ना दे।

प्रेम दे दे दरस चाहे दे चाहे ना दे।

निज दरस परस की प्यास बढ़ा दे।

निज मधुर मिलन की अगिनि लगा दे।

इक बार “तू मेरी है” बोल सुना दे।

इक बार लगा के उर चाहे भुला दे।

ना दे मिलन तो ना दे, मोहिँ उर वेदना दे।

चरणारविंद मकरंद पिला दे।

Source page 215

माँगूँ मुक्ति न तव पद भ्रमर बना दे।

कछु देना न हो तो आके सिर ही हिला दे।

अपनावोगे? हाँ या ना में बता दे।

अंधेर न कर चाहे देर लगा दे।

अब छोड़ूँ न चाहे चक्र चला दे।

तोहिँ छोड़ूँ तो जाऊँ किस द्वार बता दे।

लागी छूटे न चाहे पूरा जोर लगा दे।

तेरी माया प्रबल वाय मारि भगा दे।

तेरी माया ने भुलाया मोहिँ तू न भुला दे।

तेरी माया को जीता हो नाम बता दे।

जग अच्छे को निभाते तू बुरे को निभा दे।

जो बुरा हूँ तेरा हूँ तू अच्छा बना दे।

मैं हूँ खोटा खरों के संग चला दे।

कहलाऊँगा तेरा चाहे जो भी सज़ा दे।

शिशु माय को न जाने वाय माय जना दे।

झुँझला के ही मोहिँ इक बार बुला दे।

निज अधम उधारन विरद निभा दे।

बिनु हेतु कृपा को रूप दिखा दे।

तू “कृपालु” कृपा बिनु मोल लुटा दे।

ब्रज रस माधुरी · भाग १141
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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