कीर्तन 101–150
कीर्तन 121 · Kirtan 121
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
श्यामा मेरी ठकुरानी श्याम मेरे ठाकुर।
राधारानी ब्रजरानी ब्रजराज ठाकुर।
राधारानी ठकुरानी राधावल्लभ ठाकुर।
राधा मेरी ठकुरानी राधावर ठाकुर।
मेरी प्यारी ठकुरानी, मेरे प्यारे ठाकुर।
सोने जैसी ठकुरानी, कसौटी सो ठाकुर।
गोरी गोरी ठकुरानी कारे कारे ठाकुर।
कृपा महँ ठकुरानी जीतें हारें ठाकुर।
रस भी रसिक भी हैं ठकुरानी ठाकुर।
नित नए नए लागें ठकुरानी ठाकुर।
दोउ सुख चाहे दोउ ठकुरानी ठाकुर।
दोउ सेवा चाहे दोउ ठकुरानी ठाकुर।
छिन छिन बाढ़ै रस ठकुरानी ठाकुर।
Source page 221
प्रेम रूप ठकुरानी रूप रूप ठाकुर।
होड़ होय प्रेम रूप ठकुरानी ठाकुर।
छविनिधि रसनिधि, प्रेम सुधा निधि बाँकुर।
ठकुरानी ठाकुर, दोनों को ही ला उर।
दोनों ही सों गया हमारा, अब नाता जुर।
वृन्दावन रस सों है, लघु रस माथुर।
मथुरा के रसहूँ सों, लघु द्वारिका पुर।
श्यामा जू को दास श्याम, लोग कहें ठाकुर।
दोनों की सेवा को दोनों, रहते पल पल आतुर।
दोनों की गति दोनों जाने, जाने ना नर ना सुर।
श्याम ही हैं ठकुरानी, श्यामा ही हैं ठाकुर।
श्याम स्वामिनी ठकुरानी, श्यामा स्वामी ठाकुर।
प्राणप्यारी ठकुरानी, प्राण प्यारे ठाकुर।
प्यारे प्यारी ठकुरानी, प्यारी प्यारे ठाकुर।
जग जननी ठकुरानी, जगत पिता हैं ठाकुर।
जाको मातु पिता नहिं ऐसो, ठकुरानी ठाकुर।
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दोनों में है भेदाभेद, जो न जाने बाउर।
ब्रह्म आत्मा ठकुरानी, जीव आत्मा ठाकुर।
देही देह एक दोऊ, एइ ज्ञान ला उर।
ह्लादिनि शक्ति ठकुरानी, शक्तिमान हैं ठाकुर।
शक्ति के आधीन रहें, शक्तिमान ठाकुर।
शक्ति की शक्ती ते, सत् चित् आनंद ठाकुर।
क्षीर श्वेतिमा ठकुरानी, क्षीर रूप हैं ठाकुर।
वास करें सब उर, ठकुरानी ठाकुर।
भाग्यहीन ह्वै भाग्य रचें, ठकुरानी ठाकुर।
दया करें दीनन पर, ठकुरानी ठाकुर।
दोनों की ही भक्ति ऐसी, जैसे गोधन पागुर।
प्रेम रहे निष्काम दुहुँन ते, काम प्रेेम है आसुर।
जब हो मिलन लालसा अतिशय, जानो प्रेम आँकुर।
प्रेमीजन को प्रेमदान को, रहते दोनों आतुर।
श्यामा मेरी रसिक रँगीली, रसिक रँगीलो ठाकुर।
श्यामा मेरी गुन गर्वीली, गुन गर्वीलो ठाकुर।
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श्यामा भावै नीलो रंग, पीलो रंग ठाकुर।
कीरति गोद ठकुरानी, यशुदा गोद ठाकुर।
रानी बनि आईं ठकुरानी, ग्वारिया बनि ठाकुर।
श्यामा के पचीस गुन, चौंसठ गुन ठाकुर।
होड़ कृपा में होय जब, तब हारें ठाकुर।
श्यामा क्षम्यो जयंतहिं, दण्ड दीन्यो ठाकुर।
गुनगन दीने ठकुरानी, निर्गुन हुतो ठाकुर।
ठकुरानी के आगे न, दाल गले ठाकुर।
ठकुरानी को तो मानें, ठाकुर ठाकुर।
ठकुरानी लखि भूलें, छल छन्द ठाकुर।
ठकुरानी ताल देवें, नाचें थेइ थेइ ठाकुर।
श्यामा जू की टेढ़ी भौहें, सीधा करें ठाकुर।
श्यामा जू की पद रज, धारैं सिर ठाकुर।
श्यामा रूठी लखि होवें, नौ दो ग्यारह ठाकुर।
श्यामा जू ने चबवाये, नाकों चना ठाकुर।
छाछ दै के ठकुरानी, नचावति ठाकुर।
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श्यामा जू को न पार पायो, कोटि तन ठाकुर।
श्यामा बनीं गोरे ग्वाल, लिलिहारी ठाकुर।
श्यामा पावैं मादन रस, ललचावैं ठाकुर।
रूठें जब ठकुरानी, हा हा खायें ठाकुर।
शोभा लखि ठकुरानी, ले बलैयाँ ठाकुर।
श्यामा जू को लाड़ लड़ावैं, आठों याम ठाकुर।
श्यामा जू की जय बोलें, बोलें संग ठाकुर।
हम बुलावें श्यामा जू को, भागे आवें ठाकुर।
ठकुरानी को ला उर, अइहैं आपु ठाकुर।
श्यामा के आधीन रहें, आठों याम ठाकुर।
श्यामा की कृपा ते पायो, रास रस ठाकुर।
