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ब्रज रस माधुरी

PART I · KIRTAN 202 · 226/240

कीर्तन 201–216

कीर्तन 202 · Kirtan 202

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

15 source linesपुस्तक पृष्ठ 294PDF 315

गाइये गणपति जगवंदन।

(गाइये वृषभानु लली गुन)

गाइये गणपति जगवंदन।

सिद्धि सदन शिवशंकर नंदन।

भक्त जनन के विघ्न विनाशन।

भक्ति भाव ते करु नित अर्चन।

मन ते करु नित गणपति चिंतन।

रसना ते गाइय उन गुनगन।

जय हो जय हो गणपति त्रिभुवन वंदन।

तुम्हरो कोटि कोटि अभिनंदन।

कोउ भल गन भी ले, जग भू रज कन।

पै गणपति तव गुन नहिं सक गन।

हे गणेश गजपति लंबोदर।

कृष्ण प्रेम पाऊँ यह दो वर।

अति कृपालु तुम गौरी नंदन।

अस वर दो दे राधा दरसन।

ब्रज रस माधुरी · भाग १226
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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