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गाइये गणपति जगवंदन।
(गाइये वृषभानु लली गुन)
गाइये गणपति जगवंदन।
सिद्धि सदन शिवशंकर नंदन।
भक्त जनन के विघ्न विनाशन।
भक्ति भाव ते करु नित अर्चन।
मन ते करु नित गणपति चिंतन।
रसना ते गाइय उन गुनगन।
जय हो जय हो गणपति त्रिभुवन वंदन।
तुम्हरो कोटि कोटि अभिनंदन।
कोउ भल गन भी ले, जग भू रज कन।
पै गणपति तव गुन नहिं सक गन।
हे गणेश गजपति लंबोदर।
कृष्ण प्रेम पाऊँ यह दो वर।
अति कृपालु तुम गौरी नंदन।
अस वर दो दे राधा दरसन।
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