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श्री राम पूर्णब्रह्म सुखधाम,
(रघुपति राघव...)
श्री राम पूर्णब्रह्म सुखधाम,
श्री राम कोटि काम अभिराम।
दशरथ अजिर बिहारी राम,
कोटि मदन मनहारी राम।
राम नाम गुन लीला धाम,
सुमिरिय छिन छिन आठों याम।
रामहिं गाइय सुमिरिय राम,
भाव रहे उर महँ निष्काम।
मेरे ठाकुर सीताराम,
मोहिं नहिं चह बैकुण्ठ ललाम।
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