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ब्रज रस माधुरी

PART I · KIRTAN 115 · 139/240

कीर्तन 101–150

कीर्तन 115 · Kirtan 115

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

26 source linesपुस्तक पृष्ठ 208–209PDF 229–230

राधे गोविन्द गोविन्द बोल, राधे राधे गोविन्द बोल।

(श्यामसुन्दर हमारो..)

राधे गोविन्द गोविन्द बोल, राधे राधे गोविन्द बोल।

तेरो राधे गोविन्द प्रान,

अस कह पुनि पुनि सब श्रुति पुरान।

मन गाँठ कपट की खोल, राधे राधे गोविन्द बोल।

नामी अरु नाम समान मान,

दोउन महँ दोउन वास जान।

यह हीरा जान अनमोल, राधे राधे गोविन्द बोल।

Source page 209

चिन्मय चेतन है युगल नाम,

नहिं काल नियम, नहिं नियम धाम।

पिवु प्रेम सुधा रस घोल, राधे राधे गोविन्द बोल।

सेवा ही अपना साध्य जान,

सम नरक स्वर्ग अपवर्ग मान।

है प्रबल लालसा मोल, राधे राधे गोविन्द बोल।

बस, एक ज्ञान को राखु ध्यान,

उनहिँन सुख महँ निज सुखहिँ मान।

बिनु मोल रतन ले मोल, राधे राधे गोविन्द बोल।

सच तो है स्वामी सदृश नाम,

है नित्य दास स्वामिनी श्याम।

ले नाम प्रेम रस घोल, राधे राधे गोविन्द बोल।

रसना सों रट नित प्रति राधे,

सुमिरन नहिं छूटै पल आधे।

सँग बजे चंग ढप ढोल, राधे राधे गोविन्द बोल।

श्रुति झूठेहिँ समदर्शी बखान,

हमरे मत हैं “कृपालु” भगवान्।

दिय खोल रसिक जन पोल, राधे राधे गोविन्द बोल।

ब्रज रस माधुरी · भाग १139
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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