कीर्तन 101–150
कीर्तन 115 · Kirtan 115
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
राधे गोविन्द गोविन्द बोल, राधे राधे गोविन्द बोल।
राधे गोविन्द गोविन्द बोल, राधे राधे गोविन्द बोल।
अस कह पुनि पुनि सब श्रुति पुरान।
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पिवु प्रेम सुधा रस घोल, राधे राधे गोविन्द बोल।
है प्रबल लालसा मोल, राधे राधे गोविन्द बोल।
उनहिँन सुख महँ निज सुखहिँ मान।
बिनु मोल रतन ले मोल, राधे राधे गोविन्द बोल।
ले नाम प्रेम रस घोल, राधे राधे गोविन्द बोल।
