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ब्रज रस माधुरी

PART I · KIRTAN 35 · 59/240

कीर्तन 1–50

कीर्तन 35 · Kirtan 35

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

48 source linesपुस्तक पृष्ठ 72–74PDF 93–95

आजा प्यारी भानुदुलारी, आजा बरसाने वारी।

आजा प्यारी भानुदुलारी, आजा मोर कुटी वारी।

आजा प्यारी भानुदुलारी, आजा मान मंदिर वारी।

आजा प्यारी भानुदुलारी, आजा गहवर वन वारी।

आजा बरसाने वारी, आजा बरसाने वारी।

ऊँचे महल अटा वारी, आजा बरसाने वारी।

सँग ला प्रियतम कुंज बिहारी, आजा बरसाने वारी।

सँग ला निज सखियन सारी, आजा बरसाने वारी।

आजा रस बरसाने वारी, आजा बरसाने वारी।

आ ब्रजरस बरसाने वारी, आजा बरसाने वारी।

आजा भोरी भारी प्यारी, आजा बरसाने वारी।

आ भी जा रासेश्वरी प्यारी, आजा बरसाने वारी।

आजा कुंजविहारिणि प्यारी, आजा बरसाने वारी।

आजा मेरी प्रानन प्यारी, आजा बरसाने वारी।

आजा स्वामिनि भोरी भारी, आजा बरसाने वारी।

निज किंकरि किंकरि करि प्यारी, आजा बरसाने वारी।

आजा सिर चूनरि वारी, आजा बरसाने वारी।

Source page 73

आजा श्रुति कुण्डल वारी, आजा बरसाने वारी।

आजा नथ बेसर वारी, आजा बरसाने वारी।

आजा नीलांबर वारी, आजा बरसाने वारी।

आजा कर कंकन वारी, आजा बरसाने वारी।

आजा कटि किंकिनि वारी, आजा बरसाने वारी।

कोटि प्राण दउँ तो पै वारी, आजा बरसाने वारी।

ब्रज बनितनि हरषाने वारी, आजा बरसाने वारी।

नित लीला दरसाने वारी, आजा बरसाने वारी।

सरस रास सरसाने वारी, आजा बरसाने वारी।

अइहैं आपुहिं आपु बिहारी, आजा बरसाने वारी।

आवें स्वागत हित बनवारी, आजा बरसाने वारी।

आरति लिये खड़े गिरिधारी, आजा बरसाने वारी।

जाकर चाकर कुंजबिहारी, आजा बरसाने वारी।

छिन छिन महँ रिसियाने वारी, आजा बरसाने वारी।

हरि को आँखि दिखावनि वारी, आजा बरसाने वारी।

हरिहूँ को तरसाने वारी, आजा बरसाने वारी।

हरिहूँ को हड़काने वारी, आजा बरसाने वारी।

भृकुटिहिं हरिहिं डरावन वारी, आजा बरसाने वारी।

थर थर हरिहुँ कँपाने वारी, आजा बरसाने वारी।

Source page 74

हरि सिर चरन झुकावन वारी, आजा बरसाने वारी।

मधुर मधुर मृदु मुसुकनि वारी, आजा बरसाने वारी।

परम मधुर सुर गावनि वारी, आजा बरसाने वारी।

सरस राग सों गावनि वारी, आजा बरसाने वारी।

पंचम सुर सों गावनि वारी, आजा बरसाने वारी।

मन मंदिर में सेज सँवारी, आजा बरसाने वारी।

करिय पहरुवा महलन वारी, आजा बरसाने वारी।

बिगरी मोर बनावनि वारी, आजा बरसाने वारी।

भई बेर वृषभानुदुलारी, आजा बरसाने वारी।

अब तो हमरिहुँ सुधि लो प्यारी, आजा बरसाने वारी।

पतितन को अपनावनि वारी, आजा बरसाने वारी।

मम “कृपालु” गति तुम इक प्यारी, आजा बरसाने वारी।

ब्रज रस माधुरी · भाग १059
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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