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ब्रज रस माधुरी

PART I · KIRTAN 131 · 155/240

कीर्तन 101–150

कीर्तन 131 · Kirtan 131

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

20 source linesपुस्तक पृष्ठ 234–235PDF 255–256

जेंवत मम सद्गुरु सरकार,

गावो मिलि साधक जन जेंवनार।

छप्पन व्यंजन मन नहिं भावत,

साग-पात जेंवत बलिहार।

लखत विविध पकवान मिठाइन,

आँखि दिखावत दें फटकार।

खात खात लघु बालक जनु पुनि,

मटकत बहु विधि जनहिँ निहार।

कबहुँक भोजन करत सभ्य बनि,

कबहुँक जनु शिशु सम व्यवहार।

कबहुँक दृगन मूँदि आरोगत,

जनु कर कछु गम्भीर विचार।

Source page 235

कबहुँक हँसत हँसावत कबहुँक,

कबहुँ बिरावत दाँत निकार।

कबहुँक खात गिरावत कबहुँक,

निज पट कबहुँक आपुन थार।

कबहुँक खात करत हठ जब कोउ,

खात जात नहिं मानत हार।

लखत “कृपालु” भक्त जन कहि कहि,

जय हो जय सद्गुरु सरकार।

ब्रज रस माधुरी · भाग १155
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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