कीर्तन 51–100
कीर्तन 71 · Kirtan 71
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
राधे अधाधुंध दरबार रटे जा राधे-राधे।
राधे अधाधुंध दरबार रटे जा राधे-राधे।
जब हरि शूकर बनि आयो, पृथिवी पताल ते लायो,
कब कीन्यो रास विहार? रटे जा राधे-राधे।
जब हरि नृसिंह बनि आयो, शंकरहूँ लखि डरपायो,
कब भईं गोपिन बलिहार? रटे जा राधे-राधे।
जब हरि कच्छप बनि आयो, जलनिधि मंथन करवायो,
कब बजी मुरलि रिझवार? रटे जा राधे-राधे।
जब हरि वामन बनि आयो, बलि बाँधि पताल पठायो,
कब नाच्यो सँग ब्रजनार? रटे जा राधे-राधे।
जब हरि तनु मीन बनायो, वेदन उद्धार करायो,
कब चीर हर्यो ब्रजनार? रटे जा राधे-राधे।
जब हरि राघव बनि आयो, शूर्पणखहिँ नाक कटायो,
कब किये करोरन नार? रटे जा राधे-राधे।
जब राधा ब्रज में आयीं, अरु हरि ने लइ शरणाई,
तब भये रसिक सरदार, रटे जा राधे-राधे।
