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ब्रज रस माधुरी

PART I · KIRTAN 71 · 95/240

कीर्तन 51–100

कीर्तन 71 · Kirtan 71

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

18 source linesपुस्तक पृष्ठ 139PDF 160

राधे अधाधुंध दरबार रटे जा राधे-राधे।

(राधे अलबेली सरकार...)

राधे अधाधुंध दरबार रटे जा राधे-राधे।

जब हरि शूकर बनि आयो, पृथिवी पताल ते लायो,

कब कीन्यो रास विहार? रटे जा राधे-राधे।

जब हरि नृसिंह बनि आयो, शंकरहूँ लखि डरपायो,

कब भईं गोपिन बलिहार? रटे जा राधे-राधे।

जब हरि कच्छप बनि आयो, जलनिधि मंथन करवायो,

कब बजी मुरलि रिझवार? रटे जा राधे-राधे।

जब हरि वामन बनि आयो, बलि बाँधि पताल पठायो,

कब नाच्यो सँग ब्रजनार? रटे जा राधे-राधे।

जब हरि तनु मीन बनायो, वेदन उद्धार करायो,

कब चीर हर्यो ब्रजनार? रटे जा राधे-राधे।

जब हरि राघव बनि आयो, शूर्पणखहिँ नाक कटायो,

कब किये करोरन नार? रटे जा राधे-राधे।

जब राधा ब्रज में आयीं, अरु हरि ने लइ शरणाई,

तब भये रसिक सरदार, रटे जा राधे-राधे।

जो राधा नाम न होतो, तो कृष्ण कृष्ण नहिं होतो,

अस मम “कृपालु” सरकार, रटे जा राधे-राधे।

ब्रज रस माधुरी · भाग १095
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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