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ब्रज रस माधुरी

PART I · KIRTAN 33 · 57/240

कीर्तन 1–50

कीर्तन 33 · Kirtan 33

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

17 source linesपुस्तक पृष्ठ 69PDF 90

अलबेली सरकार वृषभानुदुलार।

(मन तेरो साँचो..)

अलबेली सरकार वृषभानुदुलार।

जाको चाकर नागर नन्दकुमार।

जाकी अगवानी कर ब्रजराजकुमार।

जाको गुन गन गावें मुरलिहिं रिझवार।

जाके रोम रोम बह ब्रजरस धार।

जासों अजित ब्रह्म ने मानी हार।

जाको चरण पलोटत हरि बलिहार।

जाके द्वार बँटत रह नित्य प्यार।

जाकी चरनन रज हरि निज सिर धार।

जाके पग बहाव हरि अँसुवन धार।

जाको वेद कहत माधुर्य सार।

जाको भेद न पायो वेद चार।

जाकी लीला अद्भुत अपरम्पार।

जाके रह दीनन आदर दरबार।

जेहि कह ह्लादिनि शक्तिहिं अवतार।

कहु अपनो मोहिं “कृपालु” इक बार।

ब्रज रस माधुरी · भाग १057
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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