लोड हो रहा है…लोड हुँदैछ…
Skip to main content

ब्रज रस माधुरी

PART I · KIRTAN 205 · 229/240

कीर्तन 201–216

कीर्तन 205 · Kirtan 205

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

71 source linesपुस्तक पृष्ठ 295–300PDF 316–321

छोटो सो कन्हैया गोविन्द राधे।

(राधा गोविन्द गीत-गोपाष्टमी)

छोटो सो कन्हैया गोविन्द राधे।

चल्यो है चरावन गैया बता दे॥

एक काँधे पै तो गोविन्द राधे।

धरि ली कन्हैया ने कामरी बता दे॥

Source page 296

दूजे काँधे पै गोविन्द राधे।

छोटी सी धरि ली लठिया बता दे॥

छोटी सी मुरली को गोविन्द राधे।

कान्ह ने खोंस ली फेंट में बता दे॥

सिर पर मोरपंख गोविन्द राधे।

कमर में पतरी करधनी बता दे॥

गल में वनमाल गोविन्द राधे।

पग में नुपूर कनक बता दे॥

कटि पीताम्बर गोविन्द राधे।

कछनी भी कछी मैया ने बता दे।।

संग में है भैया गोविन्द राधे।

मनसुख आदि सखावृंद बता दे॥

वंशीवट जाके गोविन्द राधे।

बैठे तरु छाया में बता दे॥

गैया चरन लागी गोविन्द राधे।

हरी हरी घास बड़े चाव से बता दे॥

Source page 297

चारों ओर सखा सब गोविन्द राधे।

बीच में बैठे कन्हैया बता दे॥

मुरली मधुर तान गोविन्द राधे।

छेड़ी कान्ह ने तबहीं बता दे॥

यह मन मोहिनी गोविन्द राधे।

झाँकी लखे विधि हरि हर बता दे॥

उत ते जो जाय सो गोविन्द राधे।

रुक जाय देखे झाँकी बता दे॥

गैयान कानन को गोविन्द राधे।

दोना बनाय सुनै तान बता दे॥

छोटे बड़े सखा सब गोविन्द राधे।

हास परिहास करें कान्ह सो बता दे॥

ब्रज की रमणी भी गोविन्द राधे।

लखि श्याम तनु सुधि भूली बता दे॥

जहाँ बैठे घनश्याम गोविन्द राधे।

तहाँ भई भीर गोपियों की बता दे॥

Source page 298

नभ में विमानन गोविन्द राधे।

बैठी लखें देव अंगनायें बता दे॥

भैया ने कहा कन्हैया गोविन्द राधे।

अब चलो घर भई साँझ बता दे॥

ग्वाल बाल गोपाल गोविन्द राधे।

गोपाष्टमी को गो पूजन करा दे॥

धन्य धन्य ब्रज गोप गोविन्द राधे।

ब्रह्म श्याम को भी घोड़ा बना दे॥

धनि धनसुख सखा गोविन्द राधे।

जाके रूठने पै श्याम आँसू बहा दे॥

धन्य धन्य गोपवृन्द गोविन्द राधे।

खेल में हरा हरा के कान्ह को रुला दे॥

सखा कृ ष्ण नहीं कहे गोविन्द राधे।

कभू कहें कान्हा कभू कनुआ बुला दे॥

ग्वारिया गवार बनि गोविन्द राधे।

ब्रह्म ग्वाल सुख हित ग्वालों को जिता दे॥

Source page 299

ग्राम्य ग्वाल बाल प्रेम गोविन्द राधे।

हरि से ग्राम्य लीला करवा दे॥

मनसुख श्याम से भी गोविन्द राधे।

कान पकड़ा के उठ्ठक बैठक करा दे॥

खेल से निकाल देंगे गोविन्द राधे।

ऐसा कहि धनसुख श्याम को रुला दे॥

मुरली छिना ले गाय गोविन्द राधे।

चरें नहीं बार बार मुरली बजा दे॥

सखा कहे लड्डु खा ले गोविन्द राधे।

श्याम मुख खोलैं तब अन्य को खिला दे।।

सखा खाय दहीबड़ा गोविन्द राधे।

श्याम जब माँगे सखा अँगुठा दिखा दे॥

खेल में हरा के सखा गोविन्द राधे।

सर्वद्रष्टा की आँख पट्टी बँधा दे॥

गोप बना के सखा गोविन्द राधे।

खेल में हरा के निज घोड़ा बना दे॥

Source page 300

धन्य भाग्य गोपवृन्द गोविन्द राधे।

जिनको सनातन मित्र ब्रह्म बता दे॥

ब्रज रस माधुरी · भाग १229
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

Related official book listing · Official full collection · Official author website · Read as text