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ब्रज रस माधुरी

PART I · KIRTAN 197 · 221/240

कीर्तन 151–200

कीर्तन 197 · Kirtan 197

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

27 source linesपुस्तक पृष्ठ 290–291PDF 311–312

द्वापर युग महँ गिरि गोवर्धन।

(परिक्रमा)

द्वापर युग महँ गिरि गोवर्धन।

किये स्वर्ग सम्राट इन्द्र मद मर्दन॥

गोवर्धन सोई जोई नँदनन्दन।

जोई नँदनन्दन सोई गोवर्धन॥

सब मिलि बोलो जय गिरि गोवर्धन।

पुनि सब मिलि बोलो जय नँदनन्दन॥

गोवर्धन दिव्य दिव्य नँदनन्दन।

देखे सोई जाको दिव्य दृष्टि दें रसिकजन॥

जय जय गोवर्धन जय जय नँदनन्दन।

जय जय जय जय रसिकन धन गोपीजन॥

सात दिन रात किये इन्द्र जल बरसन।

हरि ने उठाया अँगुरिन गोवर्धन॥

हार मानि आया इन्द्र ढिग गोवर्धन।

अँगुठा दिखावे सब सखा नँदनन्दन॥

नया नाम गिरिधारी पाया नँदनन्दन।

बन्द हुआ मायिक सुरपति पूजन॥

Source page 291

हरि ने उठाया जब गिरि गोवर्धन।

सखा कहें लठिया लगाओ नँदनन्दन॥

गिरिधर ब्रजधर मुरली अधर धर।

तेरी गति नहीं जाने विधि हरि हर॥

गिरिधर ब्रजधर मुरली अधर धर।

धरणी धर उर धर पीताम्बर॥

गिरि को उठाया देखा राधा नँदनन्दन।

याते तनु काँपा याते काँपा गोवर्धन॥

गिरि को उठाये बीते सात दिन सात रात।

हाथ दबा दूँ आजा गिरि ले ले दूजे हाथ॥

ब्रज रस माधुरी · भाग १221
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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