कीर्तन 151–200
कीर्तन 197 · Kirtan 197
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
द्वापर युग महँ गिरि गोवर्धन।
किये स्वर्ग सम्राट इन्द्र मद मर्दन॥
पुनि सब मिलि बोलो जय नँदनन्दन॥
देखे सोई जाको दिव्य दृष्टि दें रसिकजन॥
सात दिन रात किये इन्द्र जल बरसन।
हार मानि आया इन्द्र ढिग गोवर्धन।
अँगुठा दिखावे सब सखा नँदनन्दन॥
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तेरी गति नहीं जाने विधि हरि हर॥
गिरि को उठाया देखा राधा नँदनन्दन।
याते तनु काँपा याते काँपा गोवर्धन॥
