कीर्तन 101–150
कीर्तन 143 · Kirtan 143
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
गाने आयी मैं बधाई, प्रेम दे कौशल्या माई।
गाने आयी मैं बधाई, प्रेम दे कौशल्या माई।
आँसुओं की भेंट लायी, दिखला दे चारों भाई।
बड़ी आशा ले के आयी, चिरजीवें चारों भाई।
निज सुत ले मो कहँ अपनाई, आशिष दे कौशल्या माई।
कौन कीन्हों पुन्य माई, जासों ऐसो सुत पाई।
जेहि अजन्मा वेद गायी, वाको तूने कैसे जाई॥
भुक्ति मुक्ति ना सुहाई, दे दे सेवा चारों भाई।
