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ब्रज रस माधुरी

PART I · KIRTAN 143 · 167/240

कीर्तन 101–150

कीर्तन 143 · Kirtan 143

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

10 source linesपुस्तक पृष्ठ 242PDF 263

गाने आयी मैं बधाई, प्रेम दे कौशल्या माई।

(कृष्ण गोविन्द गोविन्द...)

गाने आयी मैं बधाई, प्रेम दे कौशल्या माई।

आँसुओं की भेंट लायी, दिखला दे चारों भाई।

बड़ी आशा ले के आयी, चिरजीवें चारों भाई।

निज सुत ले मो कहँ अपनाई, आशिष दे कौशल्या माई।

कौन कीन्हों पुन्य माई, जासों ऐसो सुत पाई।

जेहि अजन्मा वेद गायी, वाको तूने कैसे जाई॥

भुक्ति मुक्ति ना सुहाई, दे दे सेवा चारों भाई।

दे दे कनक भवन सेवकाई, दे दे अवध वास मोहिँ माई।

तू “कृपालु” जग माई, याते मेरी हूँ है माई।

ब्रज रस माधुरी · भाग १167
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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