लोड हो रहा है…लोड हुँदैछ…
Skip to main content

ब्रज रस माधुरी

PART I · KIRTAN 12 · 36/240

कीर्तन 1–50

कीर्तन 12 · Kirtan 12

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

35 source linesपुस्तक पृष्ठ 41–43PDF 62–64

तुम मेरे थे मेरे हो मेरे रहोगे, बहकूँ न अब बहकाने से।

जब समझ प्रेम में डूब गई, तब क्या होगा समझाने से।

तुम को ही तन मन धन अरपन,

तुम ही इक मेरे जीवन धन,

अब पीछे नहीं हटेगा पग, पिय! विरह चोट उर खाने से।

दे दो ऐसी विरह वेदना,

मिटि जाये मम अहं चेतना,

और अधिक चमकेगा सोना, पुनि पुनि अगिनि तपाने से।

आ या ना आ मुरली वारे,

रो रो कर हम तुम्हें पुकारें,

प्रेम बढ़ेगा छिन छिन मेरा, यूँ तेरे तड़पाने से।

पिय! तुम से ही प्रीति लगाई,

पर झोली भी सँग नहिँ लाई,

इक बार लगा लो सीने से, बलिहार जाउँ अपनाने से।

Source page 42

चाहे मम आलिंगन कर लो,

चाहे मम प्रानन ही हर लो,

चाहे जी भर कर तड़पा लो, मोहिँ काम श्याम गुन गाने से।

इक दिन प्रेम रंग लायेगा,

पिय! तुम को भी तड़पायेगा,

मैं हूँ सखी किशोरी जू की, नाता मम बरसाने से।

तुम हार मान लो बनवारी,

बदनाम न हो जाये यारी,

हारोगे, हारे हो सब दिन, पछिताओगे इतराने से।

तूू ही तो सब कुछ मेरा है,

यह कहा हुआ भी तेरा है,

जग में भी बढ़ता प्यार सदा, पिय के घर आने जाने से।

लख चौरासी स्वाँग बनाये,

नट ज्यों बहु विधि खेल दिखाये,

अब तो अपने पास बुला लो, रीझोगे न रिझाने से।

क्यों चुप हो पिय! कुछ तो बोलो,

भंडार कृपा का अब खोलो,

हो जाय न कहुँ अंधेर देर महँ, इतनी देर लगाने से।

Source page 43

चुप का मतलब अब समझ लिया,

आखिर पिय ने अपना ही लिया,

आशा तो पहले से ही थी, बिनु हेतु “कृपालु” कहाने से॥

ब्रज रस माधुरी · भाग १036
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

Related official book listing · Official full collection · Official author website · Read as text