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ब्रज रस माधुरी

PART I · KIRTAN 99 · 123/240

कीर्तन 51–100

कीर्तन 99 · Kirtan 99

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

97 source linesपुस्तक पृष्ठ 181–186PDF 202–207

पिय प्यारी पिय प्यारी,

(जय जय राधारमना)

पिय प्यारी पिय प्यारी,

प्यारी प्यारी प्यारी पिया पिया।

अद्वितीय इक तत्व ब्रह्म ने,

अपनो ही दो रूप किया।

इक था नीरस ब्रह्मनपुंसक,

इक ने पुल्लिँग बना दिया।

इक था परम स्वतंत्र महेश्वर,

इक ने किंकर बना दिया।

इक था आनँदरूप सनातन,

इक ने रोना सिखा दिया।

Source page 182

इक था चलतबिनुहिं पग श्रुति कह,

इक ने दो दो चरण दिया।

इक था निर्गुण अलख अगोचर,

इक ने अगनित गुनन दिया।

इक था कर्ता धर्ता हर्ता,

इक ने बन्दी बना दिया।

इक था “सहस्रशीर्षा पुरुषः”

इक ने नारी बना दिया।

इक को मद था इक होने का,

इक ने बहुरूपिया किया।

इक था नित निर्लेप निरंजन,

इक ने अंजन बना दिया।

इक सर्वज्ञ सर्वविद् ही था,

इक ने बाउर बना दिया।

इक था आत्माराम आत्मरति,

इक ने वाको रमण दिया।

इक था बुधि अतीत विधिहुँ बुधि,

इक ने बुद्धू बना दिया।

Source page 183

इक ने चंचल रूप बनायो,

इक ने भोरो रूप किया।

इक ने ग्वारो रूप बनायो,

इक ने रानी रूप किया।

इक तनु कीन्यो नील बरन को,

इक तनु गोरो बरन किया।

इक ने रूप कियो चाकर को,

इक ने स्वामिनि रूप किया।

पिय ने प्यारी को चित चोर्यो,

प्यारिहुँ पिय चित चोरि लिया।

प्यारी प्रानन प्यारो प्यारो,

प्यारो प्रानन प्रिया प्रिया।

पिय देखत जित दीखति प्यारी,

प्यारी जित देखति रसिया।

इक ने नट को भेष बनायो,

इक सोरह शृंगार किया।

इक ने धार्यो मोर मुकुट सिर,

इक ने सुबरन मुकुट किया।

Source page 184

इक ने पहिर्यो गुंजमाल गल,

इक ने मणि मुक्तन लरिया।

इक ने कर लकुटी लै लीन्हों,

इक ने कर आशीष दिया।

इक ने धार्यो पीताम्बर अरु,

इक नीलाम्बर धारि लिया।

इक बाबा किय नंद गोप को,

इक बाबा वृषभानु किया।

इक ने मारधाड़ किय असुरन,

इक ने केवल प्यार दिया।

इक को सदा मनावत बीत्यो,

इक ने नित प्रति मान किया।

इक जो दाता था सब जग का,

इक ने याचक बना दिया।

इक ने तहँ तहँ धरत फिर्यो सिर,

इक ने जहँ जहँ चरण दिया।

इक ब्रज तजि गयो भाजि द्वारिका,

इक ने नित ब्रज वास किया।

Source page 185

इक ने इक से लिया लिया बस,

इक ने इक को दिया दिया।

इक ने इक को प्यार किया अरु,

इक ने इक को प्यार दिया।

इक ने किया करोरन प्यारी,

इक ने इक ही पिया किया।

इक प्रकट्यो बंदीगृह मथुरा,

इक प्रकटीं महलन रनियाँ।

इक ने ढोर चरायो बन-बन,

इक ने महल निवास किया।

इक सँग लट्ठ गँवारन ग्वारन,

इक सँग गुन आगरि सखियाँ।

इक नेे तात मात किय द्वै द्वै,

इक ने इक पितु मातु किया।

इक ने तज्यो सखिन बनि निष्ठुर,

इक ने सब दिन साथ दिया।

इक ने इक को पगन पलोट्यो,

इक ने अस सौभाग्य दिया।

Source page 186

इक को नाम लेत जग पाछे,

इक को प्रथमहिं नाम दिया।

इक ने ब्रज कहुँ ठौर न पायो,

इक कृपया नँदगाम दिया।

इक ने कीन्यो तन मन टेढ़ो,

इक ने तन मन सरल किया।

इक कारो तनु करतब कारो,

इक गोरो तनु गौर हिया।

इक ने विधि हरि हरहुँ रुलाया,

इक ने वाको रुला दिया।

इक सुभाउ किय अटपट नटखट,

इक सुभाउ अति सरल किया।

इक ने सम बनि न्याय किया बस,

इक “कृपालु” बनि कृपा किया॥

ब्रज रस माधुरी · भाग १123
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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