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ब्रज रस माधुरी

PART I · KIRTAN 67 · 91/240

कीर्तन 51–100

कीर्तन 67 · Kirtan 67

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

38 source linesपुस्तक पृष्ठ 134–136PDF 155–157

मैं तो राधे राधे गाऊँ कालिंदी तट पे,

वो तो भाजो चलो आवे रोतो वंशी वट पे।

वो तो नन्द को तो रोतो धोतो आवे तट पे।

वो तो सोतो भाजे आवै, रोतो वंशीवट पे

मैं तो बावरी ह्वै नाचूँगी कालिंदी तट पे।

मैं तो दृग बाण मारुँ दृग नटखट के।

मैं तो वारी जाऊँ प्यारी जू के नीले पट पे।

प्यारी मुकुट में मोतियन लर लटके।

मेरी प्यारी जू की प्यारी भौहें कैसी मटकें।

मैं तो वारी जाऊँ प्यारी जू के दृग पट पे।

मेरी प्यारी जू के बड़े ही रसीले लटके।

मैं तो वारी प्यारी कारी घुँघरारी लट पे।

Source page 135

मेरी प्यारी जू की किंकिनि कटितट पे।

राधे रानी के चरन मेरे मन अटके।

मैं तो राधे की कहाऊँ राधे राधे रट के।

मैं तो प्यारे को चिढ़ाऊँ राधे राधे रट के।

मैं तो वारी जाऊँ पिय प्यारी खटपट पे।

मेरी प्यारी न भुलावें कभु भूले भटके।

लखि मानिनि भृकुटि न पास फटके।

मेरी प्यारी पग पियहुँ मुकुट पटके।

मैं तो प्यारी के महल जाऊँ बेखटके।

पिय प्यारी बनि पाछे आये मुँह लटके।

मैं तो प्यारी नहलाऊँ जमुना तट पै।

लखि लखि नटखट मुँह लार टपके।

मैं तो राधे को बिठाऊँ बिच दृग पट के।

मैं तो राधे पग चापूँ पिय मुँह लटके।

मैं तो प्यारी जू को पक्ष लउँ बेखटके।

मैं तो प्यारी जू की जय बोलूँ पनघट पे।

मैं तो अकड़ के जाउँ आगे नटखट के।

मैं तो गारी दउँ “दारी के” जो मोते अटके।

नेकु लोक लाज नहिं उर नटखट के।

Source page 136

वो तो निलज भजोइ आवे वंशीवट पे।

मेरी प्यारी जू न प्यारे जू के पास फटकें।

प्यारी पग पिय आँसू टप टप टपके।

मैं तो वारी जाउँ रोतो लखि नटखट पे।

प्यारी गौर रंग लखि पिय मुख लटके।

मेरो रोम रोम राधे नाम रस टपके।

दोउ एक हैं “कृपालु” मन जनि भटके।

ब्रज रस माधुरी · भाग १091
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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