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ब्रज रस माधुरी

PART I · KIRTAN 36 · 60/240

कीर्तन 1–50

कीर्तन 36 · Kirtan 36

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

106 source linesपुस्तक पृष्ठ 74–80PDF 95–101

आजा आजा राधे आके ना जा मेरी राधे।

नैनन छाजा आजा मन भाजा राधे।

उर में ही रह आजा बाहर राधे।

झलक दिखाजा पुनि जा जा ब्रज राधे।

Source page 75

है प्रतीति इक दिन आयेगी तू राधे।

चोरी चोरी आजा न बताऊँ काउ राधे।

पिय को पठा दे यदि तू ना आवे राधे।

जो ना आ तो आके कहु नहिँ आऊँ राधे।

आ या ना आ उर में दे विरहाग राधे।

रोम रोम बोले मेरे राधे राधे राधे।

तेरे बिनु जिऊँ ना बना दे अस राधे।

तेरे बिनु जीना भी क्या जीना मेरी राधे।

रोता रहूँ तव दरशन हित राधे।

मिलन ते विरहा में अति सुख राधे।

देखन दे न दृगजल छवि राधे।

जित देखूँ तित तू ही दीखे नित राधे।

गाऊँ राधे ध्यावूँ राधे पावूँ रति राधे।

जाऊँ जित पाऊँ तित दरशन राधे।

नाचूँ गाऊँ रोऊँ नित कहि कहि राधे।

वा पै बलि बलि जाऊँ जो भी बोले राधे।

मेरी गति मति रति सर्वस राधे।

अपनी बना न बना “मेरी” बनु राधे।

माने या न माने मैं हूँ तेरी दासी राधे।

Source page 76

तू ही मेरी थी रहेगी स्वामिनि राधे।

तेरी दासी दासी दासी करु मोहिं राधे।

मन तेे मैं हारा मन ले ले मेरी राधे।

तू है उर में ही बुधि में बिठा दे राधे।

ब्रजरस छकि के पिला दे मोहिँ राधे।

अस वर दे न माँगूँ कभू कछू राधे।

तेरी अष्टयामी सेवा चाहूँ बस राधे।

डगर बुहारी दऊँ जित जायें राधे।

स्वर्ग अपवर्ग नहिं चाहूँ तव राधे।

प्रेम निष्काम इक चाहूँ तव राधे।

तेरी रुचि महँ रुचि राखूँ नित राधे।

तेरे सुख को ही मानूँ निज सुख राधे।

दुख में भी तेरी कृपा मानूँ मेरी राधे।

तू ही जग में है जग तुझमें है राधे।

तू ही जब चाहे माया रचे जग राधे।

तेरी शक्ति पाके हरि पालें जग राधे।

तेरी कृपा पाके हरि कृपा करें राधे।

तू जो चाहे गूँगा करे प्रवचन राधे।

तू जो चाहे पंगुला भी गिरि चढ़े राधे।

Source page 77

तेरी सत्ता बिनु पत्ता हिले नहिं राधे।

तू तो व्यापक जल थल नभ राधे।

दिव्य दृष्टि दे दे याते देखूँ तोहिं राधे।

योगमाया माया दोनों तेरी शक्ति राधे।

मेरा पर्दा माया का उठा दे मेरी राधे।

तेरा पर्दा योगमाया का उठा दे राधे।

जगहूँ न शिशु माँ में पर्दा हो राधे।

उर ते लगाजा आजा निज शिशु राधे।

सुत को भुलाया ऐसी कैसी माँ तू राधे।

मोको क्यों भुलाया तोसों बोलूँ नहिं राधे।

देखा कैसे जाय तोसों सुत दुख राधे।

प्यार दे या मारे पाछा छोड़ूँ नहीं राधे।

पूत हो कुपूत पै कुमाता न हो राधे।

आजा मेरी राधे प्रेम अगाधे।

जनम जनम का भिखारी तोहिं का दे।

सारा जग है भिखारी दाता मेरी राधे।

भुक्ति मुक्ति माँगूँ नहिं झलक दिखा दे।

राधे ब्रजरस का चसका लगा दे।

पाछा नहिं छोडूँ चाहे चक्र चला दे।

Source page 78

माया को भगा दे सुत को जगा दे राधे।

तू तो है “कृपालु” क्यों कठोर बनी राधे।

गोविंद राधे राधे गोविंद राधे।

मेरी प्यारी राधे प्यारी ते भी प्यारी राधे।

ब्रह्म अराधे ऐसी मेरी प्यारी राधे।

ब्रह्म श्याम कुंज बिच चापैं पग राधे।

पिय ललचायें सखि चापैं पग राधे।

पिय देयँ काला टीका माथे लखि राधे।

पिय ना मिलाय सके दृग दृग राधे।

पिय नाचे सुनि धुनि राधे राधे राधे।

पिय भी हैं प्यारे किंतु अति प्यारी राधे।

पाछे कहु श्याम प्रथमहिं कहु राधे।

सब कहें राधे श्याम नहिं श्याम राधे।

श्याम सोते रोम रोम कह राधे राधे।

श्याम श्याम रोम रोम सोते कह राधे।

मदनहुँ मोहन मोहे लखि राधे।

प्रेम अगाधे मेरी प्यारी प्यारी राधे।

Source page 79

रूप अगाधे मेरी प्यारी प्यारी राधे।

भाजे आवें गोविंद गाइये राधे।

भूलें सिट्टी पिट्टी पिय लखि छवि राधे।

पिय ते मिला दूँ जब जब कह राधे।

पिय को न आने दऊँ जब कह राधे।

गिरें हरि मुरछित लखि छवि राधे।

पूर्णब्रह्म श्यामहूँ हैं आधे बिनु राधे।

पिय को बुरा ना कहो बुरा मानें राधे।

राधे कह पिय भजो पिय कह राधे।

भजो राधारानी राधारानी राधारानी।

बोलो राधारानी राधारानी राधारानी।

गावो राधारानी राधारानी राधारानी।

ध्यावो राधारानी राधारानी राधारानी।

जपो राधारानी राधारानी राधारानी।

राधे मेरी राधे मेरी राधे मेरी स्वामिनि।

राधे मेरी मैं राधे की, राधे मेरी स्वामिनि।

Source page 80

राधेरानी ठकुरानी ब्रजरसखानी।

राधेरानी ब्रजरानी अवढरदानी।

राधेरानी महरानीहूँ महरानी।

राधेरानी प्रेमरूप ब्रजरस खानी।

राधेरानी चाकर सारँगपानी।

राधेजू की करें हरि अगवानी।

हरि बोलें “जय हो, जय हो, जय हो” राधारानी।

हरि आगे सखि सखि आगे राधारानी।

हरि भूलें सुधि लखि छाया राधारानी।

मुरलि में गावें हरि गुन राधारानी।

मुकुट धरत हरि पग राधारानी।

हरि तहँ सिर जहँ पग राधारानी।

ब्रज रस माधुरी · भाग १060
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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