कीर्तन 1–50
कीर्तन 36 · Kirtan 36
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
आजा आजा राधे आके ना जा मेरी राधे।
Source page 75
है प्रतीति इक दिन आयेगी तू राधे।
चोरी चोरी आजा न बताऊँ काउ राधे।
पिय को पठा दे यदि तू ना आवे राधे।
जो ना आ तो आके कहु नहिँ आऊँ राधे।
आ या ना आ उर में दे विरहाग राधे।
रोम रोम बोले मेरे राधे राधे राधे।
तेरे बिनु जिऊँ ना बना दे अस राधे।
तेरे बिनु जीना भी क्या जीना मेरी राधे।
मिलन ते विरहा में अति सुख राधे।
जित देखूँ तित तू ही दीखे नित राधे।
गाऊँ राधे ध्यावूँ राधे पावूँ रति राधे।
नाचूँ गाऊँ रोऊँ नित कहि कहि राधे।
वा पै बलि बलि जाऊँ जो भी बोले राधे।
Source page 76
तू ही मेरी थी रहेगी स्वामिनि राधे।
तेरी दासी दासी दासी करु मोहिं राधे।
मन तेे मैं हारा मन ले ले मेरी राधे।
तू है उर में ही बुधि में बिठा दे राधे।
ब्रजरस छकि के पिला दे मोहिँ राधे।
अस वर दे न माँगूँ कभू कछू राधे।
तेरी अष्टयामी सेवा चाहूँ बस राधे।
डगर बुहारी दऊँ जित जायें राधे।
स्वर्ग अपवर्ग नहिं चाहूँ तव राधे।
प्रेम निष्काम इक चाहूँ तव राधे।
तेरी रुचि महँ रुचि राखूँ नित राधे।
तेरे सुख को ही मानूँ निज सुख राधे।
दुख में भी तेरी कृपा मानूँ मेरी राधे।
तू ही जग में है जग तुझमें है राधे।
तू ही जब चाहे माया रचे जग राधे।
तेरी शक्ति पाके हरि पालें जग राधे।
तेरी कृपा पाके हरि कृपा करें राधे।
Source page 77
तेरी सत्ता बिनु पत्ता हिले नहिं राधे।
दिव्य दृष्टि दे दे याते देखूँ तोहिं राधे।
योगमाया माया दोनों तेरी शक्ति राधे।
मेरा पर्दा माया का उठा दे मेरी राधे।
तेरा पर्दा योगमाया का उठा दे राधे।
जगहूँ न शिशु माँ में पर्दा हो राधे।
उर ते लगाजा आजा निज शिशु राधे।
सुत को भुलाया ऐसी कैसी माँ तू राधे।
मोको क्यों भुलाया तोसों बोलूँ नहिं राधे।
देखा कैसे जाय तोसों सुत दुख राधे।
प्यार दे या मारे पाछा छोड़ूँ नहीं राधे।
पूत हो कुपूत पै कुमाता न हो राधे।
जनम जनम का भिखारी तोहिं का दे।
सारा जग है भिखारी दाता मेरी राधे।
Source page 78
माया को भगा दे सुत को जगा दे राधे।
तू तो है “कृपालु” क्यों कठोर बनी राधे।
मेरी प्यारी राधे प्यारी ते भी प्यारी राधे।
ब्रह्म अराधे ऐसी मेरी प्यारी राधे।
ब्रह्म श्याम कुंज बिच चापैं पग राधे।
पिय ललचायें सखि चापैं पग राधे।
पिय देयँ काला टीका माथे लखि राधे।
पिय ना मिलाय सके दृग दृग राधे।
पिय नाचे सुनि धुनि राधे राधे राधे।
पिय भी हैं प्यारे किंतु अति प्यारी राधे।
पाछे कहु श्याम प्रथमहिं कहु राधे।
सब कहें राधे श्याम नहिं श्याम राधे।
श्याम सोते रोम रोम कह राधे राधे।
Source page 79
रूप अगाधे मेरी प्यारी प्यारी राधे।
भूलें सिट्टी पिट्टी पिय लखि छवि राधे।
पिय ते मिला दूँ जब जब कह राधे।
गिरें हरि मुरछित लखि छवि राधे।
पूर्णब्रह्म श्यामहूँ हैं आधे बिनु राधे।
पिय को बुरा ना कहो बुरा मानें राधे।
भजो राधारानी राधारानी राधारानी।
बोलो राधारानी राधारानी राधारानी।
गावो राधारानी राधारानी राधारानी।
ध्यावो राधारानी राधारानी राधारानी।
जपो राधारानी राधारानी राधारानी।
Source page 80
राधेरानी प्रेमरूप ब्रजरस खानी।
हरि बोलें “जय हो, जय हो, जय हो” राधारानी।
हरि भूलें सुधि लखि छाया राधारानी।
