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ब्रज रस माधुरी

PART I · KIRTAN 160 · 184/240

कीर्तन 151–200

कीर्तन 160 · Kirtan 160

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

15 source linesपुस्तक पृष्ठ 257–258PDF 278–279

सीताराम, सीताराम, सीताराम, सीताराम,

(राधे ठकुरानी...)

सीताराम, सीताराम, सीताराम, सीताराम,

जोई राम सोई सीता जोई सीता सोई राम।

सीताराम, सीताराम, सीताराम, सीताराम,

कभू राम बने सीता, कभू सीता बने राम।

सीताराम, सीताराम, सीताराम, सीताराम,

दोउ एक सीताराम, एक रूप द्वै नाम।

Source page 258

सीताराम, सीताराम, सीताराम, सीताराम,

गावहु सीताराम, सुमिरहु सीताराम।

सीताराम, सीताराम, सीताराम, सीताराम,

सुमिरहु नाम रूप गुण लीला जन धाम।

सीताराम, सीताराम, सीताराम, सीताराम,

सुमिरहु खाते-पीते आते जाते सीताराम।

सीताराम, सीताराम, सीताराम, सीताराम,

राम प्राण प्यारी सीता, सीता प्राण प्यारे राम।

ब्रज रस माधुरी · भाग १184
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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