लोड हो रहा है…लोड हुँदैछ…
Skip to main content

ब्रज रस माधुरी

PART I · KIRTAN 42 · 66/240

कीर्तन 1–50

कीर्तन 42 · Kirtan 42

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

24 source linesपुस्तक पृष्ठ 101–102PDF 122–123

ओ प्यारी प्यारी प्यारी, प्यारी बरसाने वारी।

(ओ माँ श्यामा...)

ओ प्यारी प्यारी प्यारी, प्यारी बरसाने वारी।

ओ भोरी भारी प्यारी, मैं तोपै वारी वारी।

बरसाने वारी प्यारी, वृषभानुदुलारी प्यारी।

नथबेसर वारी प्यारी, अति भोरी भारी प्यारी।

जोइ रोकर कह “मम प्यारी”, तेहि उर लावति सुकुमारी।

दे दो निज सेवा प्यारी, नहिं चहत पदारथ चारी।

तुम करु णा की अवतारी, बलिहारी तव बलिहारी।

तुम अति “कृपाल” महतारी, सुधि लेहु हमारिहुँ प्यारी।

बरसाने वारी प्यारी, प्यारी अति प्यारी प्यारी।

प्यारी हैं ऐसी प्यारी, प्यारिहुँ मोहे लखि प्यारी।

प्यारी सम प्यारी प्यारी, जय हो बलिहारी प्यारी।

पिय प्रानन प्यारी प्यारी, सोरह सिंगार युत प्यारी।

Source page 102

मेरी गोरी गोरी प्यारी, मेरी भोरी भारी प्यारी।

मेरी नित्य किशोरी प्यारी, मेरी पिय चित चोरी प्यारी।

ब्रजरस बरसाने वारी, सखियन हर्षाने वारी।

हरिहूँ तरसाने वारी, सुखघन को रु लाने वारी।

चापत नित तव पद प्यारी, बलिहारी पिय बनवारी।

वारौँ कोटिन बनवारी, हौं लखि “कृपालु” छवि प्यारी।

मेरे ठाकुर बनवारी, मेरी ठकुरानी प्यारी।

मम ठाकुर कुंज बिहारी, ठाकुर ठकुरानी प्यारी।

मम प्रियतम कुंजबिहारी, प्यारी बरसाने वारी।

मम जीवन दोउ पिय प्यारी, उन पर तन मन धन वारी।

जीवन जीवन बनवारी, बनवारी जीवन प्यारी।

ब्रज रस माधुरी · भाग १066
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

Related official book listing · Official full collection · Official author website · Read as text