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ब्रज रस माधुरी

PART I · KIRTAN 213 · 237/240

कीर्तन 201–216

कीर्तन 213 · Kirtan 213

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

14 source linesपुस्तक पृष्ठ 306–307PDF 327–328

सुन के आया हूँ सरकार तेरे कूचे में,

बख्शे जाते हैं गुनहगार तेरे कूचे में।

सारे आलम की है बहार तेरे कूचे में,

मुझे तो मिलता है बस प्यार तेरे कूचे में।

सरकार शाहे आलम कुछ शेर अर्ज़ है ये,

गुस्ताख़ी माफ हो पर, सुन कर बुरा न मानें।

Source page 307

है तेरा नाम जैसा देखा न काम वैसा,

मयकश तरस रहे हैं मुद्दत से तू भी जाने।

पैमाने की ज़रूरत तुझको नहीं है साकी,

कर दे करम नज़र से हो जायें हम दिवाने।

दिल दे के ले ले दिलवर, यह शर्त ले ले वापस,

दिल ले के दे दे दिलवर, अब कर न कुछ बहाने।

चुप हैं ज़नाब यारों मतलब है साफ़ इसका,

देंगे, “कृपालु” को भी, अब दो न इनको ताने।

ब्रज रस माधुरी · भाग १237
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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