कीर्तन 201–216
कीर्तन 213 · Kirtan 213
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
सुन के आया हूँ सरकार तेरे कूचे में,
बख्शे जाते हैं गुनहगार तेरे कूचे में।
सारे आलम की है बहार तेरे कूचे में,
मुझे तो मिलता है बस प्यार तेरे कूचे में।
Source page 307
है तेरा नाम जैसा देखा न काम वैसा,
मयकश तरस रहे हैं मुद्दत से तू भी जाने।
पैमाने की ज़रूरत तुझको नहीं है साकी,
कर दे करम नज़र से हो जायें हम दिवाने।
दिल दे के ले ले दिलवर, यह शर्त ले ले वापस,
दिल ले के दे दे दिलवर, अब कर न कुछ बहाने।
