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ब्रज रस माधुरी

PART I · KIRTAN 109 · 133/240

कीर्तन 101–150

कीर्तन 109 · Kirtan 109

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

45 source linesपुस्तक पृष्ठ 198–200PDF 219–221

मेरे प्राणाधार हैं, पिय प्यारी के पादारविंद।

(मेरे तो आधार है...)

मेरे प्राणाधार हैं, पिय प्यारी के पादारविंद।

प्यारी के पादारविंद, बिहारी के पादारविंद।

गोरे पद राधिका के, नीले पद गोविंद।

मेरो मन ह्वैहैं कब, पाद पद्म को मिलिंद।

पतितन मन धोवें, ध्यावें जो पादारविंद।

प्रेम के आधीन रहें, श्रुति कहे स्वच्छंद।

आनंदहुँ दे आनंद, ऐसो राधा गोविंद।

भोरी भानुनंदिनी हैं, नटखट नंदनंद।

सोरहूँ सिँगार प्यारी, नटवेष नंदनंद।

मेरे नैन चकोर हैं, दोउ पद नख मणि चंद।

पिय संग सखा वृन्द, प्यारी संग सखी वृन्द।

दोउ पद नख मणि, चंद्रिका पै वारौं चंद।

चुवत रहत नित, दोउ पद प्रेमानंद।

प्रेमानंद बिंदु पर, वारौं कोटि ब्रह्मानंद।

Source page 199

ब्रह्म रूप आनँद, नंदनंदानंद कंद।

ब्रह्मानंदी याचैं जाको, पाद पद्म मकरंद।

गोपी बने डोलें शंभु, ऐसो है या प्रेमानंद।

प्यारी ह्लादिनी शक्ति रूपा, जाको दास गोविंद।

मादन रस पावें प्यारी, नहिं पावें कृष्ण चंद।

लाली के आगे न चले, लाल जू को छल छंद।

लाली पग धोवें लाल, सलिल सुता कलिंद।

लाली जब मान करें, लाल की हो वाणी बंद।

लाल जब मान करें, लाली डोलें निर्द्वन्द।

लाली लखि लाल जू को, भूलि जायँ दंद फंद।

लाल भजे लाली आवें, लाली भजे नन्दनन्द।

लाली चलें हंस चाल, लाल चलें ज्यों गयंद।

ग्वाल बाल चाल चलें, मानो सेना कपि वृंद।

धन्य भूप वृषभानु, धन्य धन्य भूप नंद।

लाली राजें भानु अंक, लाल राजें अंक नंद।

लाली लाल राजें नित, मेेेरे हृदयारविंद।

श्याम पियें श्यामानंद, श्यामा पियें श्यामानंद।

श्यामा श्यामानंद पियें, ब्रज गोपी गोप वृंद।

श्यामा श्याम भरोसे हौं तो, सोउँ तानि निर्द्वन्द।

Source page 200

प्यारी जू ते प्यारो प्यारो, प्यारी प्यारी गोविंद।

हाय प्यारे! कहें प्यारी, हाय प्यारी! गोविंद।

दोऊ चाहें दोऊ सुख, धन्य धन्य प्रेमानन्द।

दोउ पद अरविंद, सत चित आनँद।

दोउ उर फँसे दोउ, प्रेमानंद के फंद।

दोउ हृदयारविंद, बसे दोउ पद द्वंद।

दोउ गुन गावें दोउ, दोउ दृग पट बंद।

दोउ गति जानें दोउ, कहा जानें श्रुति छंद।

देही देह भेद नहिं, दोउ सच्चिदानन्द।

दोनों में है भेदाभेद, ऐसो राधा गोविंद।

चिन्मय दोउ पद द्वन्द, का जाने “कृपालु” मंद।

ब्रज रस माधुरी · भाग १133
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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