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ब्रज रस माधुरी

PART I · KIRTAN 82 · 106/240

कीर्तन 51–100

कीर्तन 82 · Kirtan 82

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

33 source linesपुस्तक पृष्ठ 153–155PDF 174–176

हमारी राधे रानी, रस की खानी।

विराजें नित वृन्दावन रजधानी।

हमारी ठकुरानी राधेरानी।

प्रेमरस खानी राधेरानी।

हमारी इक स्वामिनि राधेरानी।

श्यामहूँ स्वामिनि राधेरानी।

Source page 154

रूप की रानी राधेरानी।

मोहनहूँ मोहिनि राधेरानी।

चाल गजगामिनि राधेरानी।

देह दुति दामिनि राधेरानी।

सँग ब्रजभामिनि राधेरानी।

रास रस दानी राधेरानी।

चुनरि अरु लहँगा आसमानी।

करें अगवानी सारँग पानी।

पलोटेँ पग मोहन स्वामिनि मानी।

न कोउ अस जग महँ अवढर दानी।

अकारण करुणा जिनकी बानी।

रही अनजानी अब मैं जानी।

न करो राधारानी आनाकानी।

बुलावो मोहिं बारेक अपनी मानी।

बनी पनिहारिनि भरिहौं पानी।

तजी हम लोकन वेदन कानी।

खरी रहौं लै कर पीकदानी।

करोरन कमला नौकरानी।

दिवानी जाकी निशिदिन कमला वानी।

Source page 155

चरण रज माँगें कमला वानी।

बने येहि रस लगि शिव शिवानी।

खरे कर मीजैं ब्रह्मज्ञानी।

मुकुट धरें पग पर चक्रपानी।

डरावें हरिहूँ को भौंह तानी।

कृपा ते रसिकन अब मैं जानी।

कृपालु नहिं कोउ जस राधारानी।

“कृपालु” की भी सुधि लो राधारानी।

ब्रज रस माधुरी · भाग १106
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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