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ब्रज रस माधुरी

PART I · KIRTAN 105 · 129/240

कीर्तन 101–150

कीर्तन 105 · Kirtan 105

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

18 source linesपुस्तक पृष्ठ 195PDF 216

भज श्रीकृष्णं भज श्री कृष्णं श्रीकृष्णं भज श्री कृष्णम्।

(श्यामा मेरी ठकुरानी...)

भज श्रीकृष्णं भज श्री कृष्णं श्रीकृष्णं भज श्री कृष्णम्।

भज श्रीराधां भज श्रीराधां श्रीराधां भज श्रीराधाम्।

भज गोपालं भज गोपालं गोपालं भज गोपालम्।

नीलमणिं भज नीलमणिं भज नीलमणिं भज नीलमणिम्।

भानुसुतां भज भानुसुतां भज भानुसुतां भज भानुसुताम्।

ब्रजगोपं भज ब्रजगोपं भज ब्रजगोपं भज ब्रजगोपम्।

ब्रजधेनुं भज ब्रजधेनुं भज ब्रजधेनुं भज ब्रजधेनुम्।

ब्रजरेणुं भज ब्रजरेणुं भज ब्रजरेणुं भज ब्रजरेणुम्।

भज बलरामं भज बलरामं बलरामं भज बलरामम्।

भज श्री नन्दं भज श्री नन्दं श्री नन्दं भज श्री नन्दम्॥

भज सुखकन्दं भज सुखकन्दं सुखकन्दं भज सुखकन्दम्।

भज आनन्दं भज आनन्दं आनन्दं भज आनन्दम्।

भज राधेशं भज राधेशं राधेशं भज राधेशम्।

भज गोपेशं भज गोपेशं गोपेशं भज गोपेशम्।

भज गोपीशं भज गोपीशं गोपीशं भज गोपीशम्।

भज भगवन्तं भज भगवन्तं भगवन्तं भज भगवन्तम्।

भजत “कृपालुं” भज नटवेषं नटवेषं भज नटवेषम्।

ब्रज रस माधुरी · भाग १129
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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