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ब्रज रस माधुरी

PART I · KIRTAN 23 · 47/240

कीर्तन 1–50

कीर्तन 23 · Kirtan 23

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

29 source linesपुस्तक पृष्ठ 52–53PDF 73–74

मन तेरो साँचो यार, ब्रजराजकुमार।

तेरो सोई स्वामी, सोई सखा, सुत, भरतार।

झूठे जग व्यवहार, झूठे सब नातेदार।

रसिकन दरबार, तेरो सोई घरबार।

जाको ऐसो नातेदार, वा पै कोटिन प्राण वार।

धन्य धन्य ब्रजनार, तेरो सोई कर्णधार।

रागानुगा व्रतधार, अपनाव भाव चार।

भक्ति गाई नव प्रकार, तामें रूपध्यान सार।

भावे जोई संसार, तामें देखु खड़ो यार।

मुक्ति चार भार डार, पियसुख व्रत धार।

तेरो दोऊ प्राणाधार, हरि गुरु इक सार।

सोचो पिय प्यारी प्यार, सोचो युगल विहार।

तू ना जाने तू गमार, परखत तेरो यार।

करु करुण पुकार, ऐहैं भुजन पसार।

दीन्यो लता पता कूँ प्यार, ऐसो कौन अवतार।

पाई पूतना सी नार गति, ऐसो को उदार।

करे कुब्जाहूँ सों प्यार, यार कितनो उदार।

Source page 53

बने घोड़ा सखा सवार, देखो कैसो रिझवार।

मान्यो यशुदा सों हार, बँध्यो ऊखल निहार।

नाचे छाछ लगि यार, देखो गोपीजन प्यार।

ब्रजगारी सुनि यार, वाते कहे बलिहार।

ऐसो गोपी प्रेम यार, पायो पद चौर जार।

जैसो जीव करे प्यार, तैसो करे प्यार यार।

अपवाद गोपी प्यार, जामें ऋणी माने यार।

तेरी यारी कैसी यार, गरबाहींहूँ न डार।

तेरी यारी सों ही प्यार, प्यार दे या ना दे यार।

दृग अँसुवन हार, पहिराउ यार हार।

एक बार मानु यार, फिर देखु यार प्यार।

करु अब न अबार, जा “कृपालु” दरबार॥

ब्रज रस माधुरी · भाग १047
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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