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ब्रज रस माधुरी

PART I · KIRTAN 113 · 137/240

कीर्तन 101–150

कीर्तन 113 · Kirtan 113

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

20 source linesपुस्तक पृष्ठ 206–207PDF 227–228

राधे राधे गोविंद गोविंद राधे राधे।

(श्री गुरुदेव कृपाल...)

राधे राधे गोविंद गोविंद राधे राधे।

ह्लादिनि शक्ती राधे, शक्तिमान हैं गोविंद,

इक दूजे बिनु दोउ रहें आधे आधे।

यद्यपि दोउ इक राधे गोविंद,

तदपि रटत हरि निशि दिन राधे राधे।

सत चित आनन्द गोविंद श्रुति कह,

सदघन चिदघन आनंदघन राधे।

प्रेम तत्व अवतार गोविंद,

प्रेम तत्व अवतारी प्यारी राधे।

सिंहासन आरूढ़ ललिहिं लखि,

भुज उठाय हरि कह जय राधे राधे।

मनिहारिनि लिलिहारिनि बनि बनि,

रिझवत कहि कहि दरस दिखा दे राधे।

मानिनि लखि स्वामिनिहिं मनावत,

कहि तुम बिनु नहिं कल इक पल राधे।

इन्द्रनीलमणि सम रँग गोविंद,

Source page 207

दामिनि दुति सम गौर किशोरी राधे।

यद्यपि दोउ “कृपालु” मम ठाकुर,

तदपि बात कछु औरहिं रानी राधे।

ब्रज रस माधुरी · भाग १137
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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