कीर्तन 101–150
कीर्तन 113 · Kirtan 113
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
राधे राधे गोविंद गोविंद राधे राधे।
राधे राधे गोविंद गोविंद राधे राधे।
ह्लादिनि शक्ती राधे, शक्तिमान हैं गोविंद,
इक दूजे बिनु दोउ रहें आधे आधे।
तदपि रटत हरि निशि दिन राधे राधे।
सत चित आनन्द गोविंद श्रुति कह,
प्रेम तत्व अवतारी प्यारी राधे।
रिझवत कहि कहि दरस दिखा दे राधे।
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