कीर्तन 51–100
कीर्तन 98 · Kirtan 98
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
श्री राधे राधे गोविंद राधे, श्री राधे राधे गोविंद राधे।
श्री राधे राधे गोविंद राधे, श्री राधे राधे गोविंद राधे।
हमारो ऐसो गोविंद राधे, दोउ दोउन अवराधे।
गाव गुन गोविंद राधे, ध्यान मन महँ रह साधे।
पुकारो रो के गोविंद राधे, भजत अइहैं गलबहियाँ दे।
शरण गहु गोविंद राधे, न व्यापै टुक भव भय बाधे।
भजहु अस गोविंद राधे, भुक्ति अरु मुक्ति भुला दे।
भजहु अस गोविंद राधे, कलप सम लग पल आधे।
तेरो ही सुख गोविन्द राधे, चाहूँ मन ऐसा बना दे।
मिलन ना दे गोविन्द राधे, मिलन की व्याकुलता दे।
तू रस सिन्धु गोविन्द राधे, वाई में मेरे मन को डुबा दे।
तू दे या ना दे गोविन्द राधे, गोपी ते गोपी प्रेम दिला दे।
तू ही है मेरा गोविन्द राधे, रहेगा यह बुधि में बिठा दे।
सात पाँच ना दे मोहिं राधे, काउ ते गोपी प्रेम दिला दे।
न माँगो कछु गोविन्द राधे, माँगो तो माँगो माँगना मिटा दे।
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सरस अस गोविंद राधे, आपु लखि सुरति भुला दे।
जीवन धन गोविंद राधे, न भूलो मन पल छिन आधे।
लगा दे मन गोविंद राधे, चरण निज माया भगा दे।
सुमिरें उत गोविंद राधे, सुमिरें इत गोविंद राधे।
दोउ इक गोविंद राधे, सच्चिदानंद सदा ते।
सुमिरो नित गोविंद राधे, न भूलो मन पल छिन आधे।
तू ही तो मेरा गोविंद राधे, भुलायो मोहिं काहे बता दे।
तोहीं सों मेरा गोविंद राधे, है स्वामी सखा सुत पति नाते।
चाह इक गोविंद राधे, मेरा दासत्व दिला दे।
तू उर रह गोविंद राधे, बोध यह सतत करा दे।
चाह यह गोविंद राधे, अष्टयामी सेवा दे।
प्रेम दे दे गोविंद राधे, भुक्ति मुक्ति बैकुण्ठ ना दे।
घटे न कछु गोविंद राधे, प्रेम रस बिंदु पिला दे।
तेरा ही सब गोविंद राधे, बता दे तू ही पुनि तोहिं का दे।
भिखारी माँगे गोविंद राधे, प्रेम गोपीजन का दिला दे।
न जानूँ तोहिं गोविंद राधे, न जानूँ निज रूप जना दे।
न लागी छूटे गोविन्द राधे,तू चाहे सारा जोर लगा दे॥
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न छोड़ूँ पाछा गोविंद राधे, मिलन दे या विरहा दे।
पतित हित गोविंद राधे, तोहिं तजि ठौर बता दे।
दीन की गोविंद राधे, सुने को वाको नाम बता दे।
अकारण गोविंद राधे, कृपालु कौन तुझसा बता दे।
