श्री भानुदुलारी की आरती
आरती भानुदुलारी की, कि श्री बरसाने वारी की।
बिराजैं सिंहासन श्यामा,
दिव्य श्री वृन्दावन धामा,
ढुरावैं चँवर सुघर बामा,
पलोटैं पग पूरनकामा,
लली पग अंक, चापि निःशंक, श्याम जनु रंक,
पाइ निधि पारस प्यारी की ॥ 1॥
गौर सिर कनक मुकुट राजै,
चन्द्रिका चारु सुछवि छाजै,
कुटिल कुन्तल अलि भल भ्राजै,
लखत जेहि शिखि कलाप लाजै,
माँग सिन्दूर, मोतियन पूर, सजीवन मूर,
ब्रह्म गोवर्धनधारी की ॥ 2॥
Source page 14
श्रवण बिच करणफूल झलकै,
नासिका बिच बेसर हलकै,
नयन बिच प्रेम सुधा छलकै,
बन्धु बल के लखि लखि ललकै,
चपल नथ-चमक, दसन-दुति-दमक, सुमुखि-मुख-रमक
मधुर मुसुकनि सुकुमारी की ॥ 3 ॥
मोतियन लर उर मणि माला,
चिबुक झलकत इक तिल काला,
शम्भु शुक दैं सँग कर ताला,
लली गुन गावति ब्रजबाला,
कबहुँ मुख मुरनि, कबहुँ दृग दुरनि, कबहुँ दृग जुरनि
कबहुँ सुधि भुरनि बिहारी की ॥ 4 ॥
किनारिन जरिन नील सारी,
कंचुकी कुमकुम रँग वारी,
चुरी कर कंकन मनहारी,
छीन कटि किंकिनि छवि न्यारी,
पायलनि पगनि, मिहावरि लगनि, बीछुवनि नगनि,
“कृपालु” सुकीर्ति-कुमारी की ॥ 5 ॥