कीर्तन 1–50
कीर्तन 24 · Kirtan 24
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
मेरी राधारमण सों यारी, तन मन-धन उन पर वारी।
मेरी राधारमण सों यारी, तन मन-धन उन पर वारी।
बनवारी सों ह्वै गइ यारी, तन मन धन उन पर वारी।
Source page 54
मेरी राधारमण सों यारी, क्या समझेगा कोउ संसारी।
मेरी राधारमण सों यारी, छोड़ दी लोक की लाज सारी।
मेरी राधारमण सों यारी, मेरी यारी जगत सों न्यारी।
मेरी राधारमण सों यारी, खारी लग मुक्तिहुँ चारी।
मेरी राधारमण सों यारी, उनहिंन सुख महँ बलिहारी।
मेरी राधारमण सों यारी, मुख तकत रहत श्रुति चारी।
मेरी राधारमण सों यारी, अब लागी न छूटन वारी।
मेरी राधारमण सों यारी, ह्वै गये मदनारी नारी।
मेरी राधारमण सों यारी, मेरी यारी पै यार बलिहारी।
मेरी राधारमण सों यारी, मेरी मुट्ठी में कुंजबिहारी।
मेरी राधारमण सों यारी, इक दिन मिलिहहिँ कहि “प्यारी”।
मेरी राधारमण सों यारी, मैं भई सुहागिनि नारी।
मेरी राधारमण सों यारी, मेरी यारी परी वाय भारी।
मेरी राधारमण सों यारी, यार यारी न जाने अनारी।
मेरी राधारमण सों यारी, कबहूँ कह हरि मोहिं “प्यारी”।
मेरी राधारमण सों यारी, मेरी अँगुली पै नाचें बिहारी।
मेरी राधारमण सों यारी, मैं डोरी पतंग बिहारी।
Source page 55
मेरी राधारमण सों यारी, यार जारी पै गइ वारी वारी।
मेरी राधारमण सों यारी, सखि कह वाको तनु कारी।
मेरी राधारमण सों यारी, पिय मेरो बाल ब्रह्मचारी।
