कीर्तन 1–50
कीर्तन 25 · Kirtan 25
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
मेरो राधारमण चितचोर, टुक हेरहु हमरिहुँ ओर।
मेरो राधारमण चितचोर, टुक हेरहु हमरिहुँ ओर।
मेरो जीवन जुगल किशोर, लो मोर चपल चित चोर।
उत कारो रँग तनु तोर, इत कारो रँग मन मोर।
तू ही इक सर्वस मोर, हैं तुम्हरे लाख करोर।
तू ही है सब कुछ मोर, अब छोड़ू न पाछा तोर।
मन मधुर मिलन चह तोर, पुरवहु अभिलाषा मोर।
सेवा अभिलाषा मोर, बैकुण्ठ न माँगूँ तोर।
तू रसिकन को सिरमोर, टुक रस दे हौंहूँ तोर।
यह माया अति बरजोर, बरजो ब्रजराज किशोर।
Source page 56
कहि दे बारेक तू मोर, कछु घटि न जायगो तोर।
मायिक मन बुधि है मोर, है कृपा साध्य रति तोर।
बिनु हेतु कृपा व्रत तोर, कत सुधि न लेत पुनि मोर।
