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ब्रज रस माधुरी

PART I · KIRTAN 85 · 109/240

कीर्तन 51–100

कीर्तन 85 · Kirtan 85

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

14 source linesपुस्तक पृष्ठ 159–160PDF 180–181

ओरे मोरे मन, राधिका रमन,

निशि दिन गुन गन गाये जा।

छिन छिन नेह बढ़ाये जा।

पल पल प्रेम बढ़ाये जा।

वह जीवन क्या जीवन जिसमें, जीवनधन से प्यार न हो,

है वह प्यार प्यार क्या जिसमें, पियसुख में बलिहार न हो।

श्यामा श्याम मिलन हित, नित प्रति,

नैनन नीर बहाये जा।

मन गोविंद गुन गाये जा।

पिय प्रानन प्यारी सुकुमारी, भानुदुलारी जान रे,

चाकर बनि नित करत चाकरी, सुंदरश्याम सुजान रे॥

Source page 160

प्रेम “कृपालु” सुधा चाखन हित,

राधे राधे गाये जा।

राधे के गुन गाये जा।

ब्रज रस माधुरी · भाग १109
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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