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ओरे मोरे मन, राधिका रमन,
निशि दिन गुन गन गाये जा।
छिन छिन नेह बढ़ाये जा।
पल पल प्रेम बढ़ाये जा।
वह जीवन क्या जीवन जिसमें, जीवनधन से प्यार न हो,
है वह प्यार प्यार क्या जिसमें, पियसुख में बलिहार न हो।
श्यामा श्याम मिलन हित, नित प्रति,
नैनन नीर बहाये जा।
मन गोविंद गुन गाये जा।
पिय प्रानन प्यारी सुकुमारी, भानुदुलारी जान रे,
चाकर बनि नित करत चाकरी, सुंदरश्याम सुजान रे॥
Source page 160
प्रेम “कृपालु” सुधा चाखन हित,
राधे राधे गाये जा।
राधे के गुन गाये जा।
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