कीर्तन 51–100
कीर्तन 62 · Kirtan 62
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
मेरी श्री वृषभानुदुलारी, जाकर चाकर बनवारी।
मेरी श्री वृषभानुदुलारी, जाकर चाकर बनवारी।
मेरी श्री वृषभानुदुलारी, मेरी प्रानन प्यारी प्यारी।
मेरी श्री वृषभानुदुलारी, भोरी बरसाने वारी।
मेरी श्री वृषभानुदुलारी, सिर चूनरि पर बलिहारी।
मेरी श्री वृषभानुदुलारी, चितवनि रस जान मुरारी।
मेरी श्री वृषभानुदुलारी, है नीलाम्बर छवि न्यारी।
मेरी श्री वृषभानुदुलारी, किंकिनि धुनि मुनि मन हारी।
मेरी श्री वृषभानुदुलारी, पग पायल मृदु झनकारी।
मेरी श्री वृषभानुदुलारी, गति हंस लजावनि हारी।
मेरी श्री वृषभानुदुलारी, स्वामिनि “कृपालु” बलिहारी।
मेरी श्री बरसानेवारी, मेरी भोरी भारी प्यारी।
मेरी प्यारी अति सुकुमारी, मेरी ब्रजरसवारी प्यारी।
Source page 131
मेरी चिदानंद तनु वारी, मेरी कीर्तिकुमारी प्यारी।
