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ब्रज रस माधुरी

PART I · KIRTAN 62 · 86/240

कीर्तन 51–100

कीर्तन 62 · Kirtan 62

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

18 source linesपुस्तक पृष्ठ 130–131PDF 151–152

मेरी श्री वृषभानुदुलारी, जाकर चाकर बनवारी।

(मेरो प्रियतम कुंज बिहारी...)

मेरी श्री वृषभानुदुलारी, जाकर चाकर बनवारी।

मेरी श्री वृषभानुदुलारी, मेरी प्रानन प्यारी प्यारी।

मेरी श्री वृषभानुदुलारी, भोरी बरसाने वारी।

मेरी श्री वृषभानुदुलारी, सिर चूनरि पर बलिहारी।

मेरी श्री वृषभानुदुलारी, चितवनि रस जान मुरारी।

मेरी श्री वृषभानुदुलारी, है नीलाम्बर छवि न्यारी।

मेरी श्री वृषभानुदुलारी, किंकिनि धुनि मुनि मन हारी।

मेरी श्री वृषभानुदुलारी, पग पायल मृदु झनकारी।

मेरी श्री वृषभानुदुलारी, गति हंस लजावनि हारी।

मेरी श्री वृषभानुदुलारी, स्वामिनि “कृपालु” बलिहारी।

मेरी श्री बरसानेवारी, मेरी भोरी भारी प्यारी।

मेरी प्यारी अति सुकुमारी, मेरी ब्रजरसवारी प्यारी।

मेरी ब्रजरस बेचनवारी, मेरी महाभाव अवतारी।

मेरी प्यारी पर पिय वारी, मेरी प्यारी सम इक प्यारी।

Source page 131

मेरी चिदानंद तनु वारी, मेरी कीर्तिकुमारी प्यारी।

मेरी प्रेमरूपरस वारी, मेरी गति मति रति हैं प्यारी।

मेरी नित नव नव रसवारी, मेरी अति कृपालु हैं प्यारी।

ब्रज रस माधुरी · भाग १086
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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