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ब्रज रस माधुरी

PART I · KIRTAN 95 · 119/240

कीर्तन 51–100

कीर्तन 95 · Kirtan 95

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

41 source linesपुस्तक पृष्ठ 174–176PDF 195–197

जय जय श्यामा जय ब्रजबाम,

(जय जय श्यामा...)

जय जय श्यामा जय ब्रजबाम,

जय जय श्री बरसानो धाम।

जय जय रसिक रँगीलो श्याम,

जय जय जय जय श्री नंदगाम।

नित्य धाम, दोउ श्यामा श्याम,

इक बरसानो इक नँदगाम।

दोउ मम ठाकुर श्यामा श्याम,

दोउ विहरत वृन्दावन धाम।

दोउ मम ठाकुर पूरनकाम।

दोउ एक हैं द्वै तनु द्वै नाम।

Source page 175

प्रेम रूप दोउ श्यामा श्याम,

दोउ प्यासे दोउ पूरन काम।

रसिक शिरोमणि श्यामा श्याम,

विहरत कुंजनि आठों याम।

प्रेम धनी दोउ श्यामा श्याम,

बरसावत ब्रजरस ब्रजधाम।

दोउ मन बुधि इक श्यामा श्याम,

लीला हित भये द्वै ब्रजधाम।

यद्यपि द्वै तनु श्यामा श्याम,

तदपि आत्मा इक अभिराम।

द्वै एक, एक द्वै श्यामा श्याम,

यह रहस्य जानति ब्रजबाम।

श्यामा बड़ नहिं बड़ नहिं श्याम,

बड़ो प्रेमवश दोउ सुखधाम।

श्यामामय रह नित घनश्याम,

श्याममयी श्यामा बसुयाम।

श्यामा सेवति नित घनश्याम,

श्यामा कहँ सेवत सुखधाम।

श्यामा चह नित सुख घनश्याम,

श्यामा सुख चह नित सुखधाम।

Source page 176

प्यासे रह दोऊ वसुयाम,

धन्य प्रेम धनि श्यामा श्याम।

धन्य प्रेम धनि धनि ब्रजबाम,

जाके वश रह श्यामा श्याम।

दोऊन चाहहु प्रेम निष्काम।

दोऊ विहरत वृन्दावन धाम।

मेरे ह्वै गये श्यामा श्याम,

छकी रहौं हौं आठों याम।

कह “कृपालु” दोउ पूरन काम,

तदपि रहत नित ब्रजरस काम।

ब्रज रस माधुरी · भाग १119
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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